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नारी के सम्मान के बिना स्वस्थ समाज का निर्माण असंभव मातृ शक्ति सम्मेलन में बोले संघ प्रमुख

भोपाल प्रवक्ता.कॉम 03 जनवरी 2026

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संघ की शताब्दी वर्ष पर आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मातृ शक्ति सम्मेलन में संघ प्रमुख मोहन भगवार ने स्व आधारित जीवनशैली की चर्चा करते हुए कहा कि स्व का भाव समाज और राष्ट्र तक पहुंचाने का कार्य भी महिला ही करती है। जिस प्रकार घर के ‘स्व’ में महिला की भूमिका होती है, वही भूमिका देश के ‘स्व’ में भी होनी चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य और जीवन दृष्टि

मानसिक तनाव और आत्महत्या जैसे विषयों पर बोलते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि घर में कोई भी व्यक्ति अकेला महसूस न करे, यह अत्यंत आवश्यक है। अपनापन न मिलने से व्यक्ति अकेला पड़ जाता है, जो मानसिक तनाव का बड़ा कारण बनता है। उन्होंने बच्चों पर असंभव लक्ष्य थोपने से बचने की सलाह दी और कहा कि बच्चों की रुचि को समझकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन में सफलता से अधिक महत्वपूर्ण जीवन की सार्थकता है।

मातृशक्ति की भूमिका निर्णायक


अपने पाथेय में डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि गुलामी का दौर समाप्त हो चुका है और अब भारत मानसिक दासता से भी बाहर निकल रहा है। विश्व आज भारत की ओर देख रहा है और भारत उस भूमिका के लिए स्वयं को तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी महिलाएं हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं समाज और राष्ट्र के लिए कार्य कर रही हैं, लेकिन अभी भी बहुत सी महिलाएं इस प्रक्रिया से जुड़ी नहीं हैं। ऐसी महिलाओं के प्रबोधन के लिए विशेष प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि जहां नारी का सम्मान और स्थान सुरक्षित होता है, वहां समाज स्वतः ही स्वस्थ रहता है। यही “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” का वास्तविक अर्थ है। उन्होंने यह भी कहा कि आज सांस्कृतिक आक्रमण के रूप में नई चुनौतियां सामने हैं, जिन्हें कक्चरल मार्क्सिज्म और वोकिज़्म जैसे नाम दिए जाते हैं। इनका सामना करने के लिए अपने धर्म, मूल्यों और संस्कारों को गहराई से समझना आवश्यक है।

डॉ. भागवत ने विश्वास जताया कि जब देश की मातृशक्ति इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएगी, तब समाज और राष्ट्र दोनों को सशक्त बनाना संभव होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हम जो कार्य करेंगे, वही आने वाले सैकड़ों वर्षों तक स्मरण रखा जाएगा। इसलिए इस ऐतिहासिक कालखंड में अपनी भूमिका को समझना और निभाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम का समापन मातृशक्ति की भूमिका को केंद्र में रखकर समाज और राष्ट्र निर्माण के संकल्प और वंदे मातरम के साथ हुआ।

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