स्वास्थ्य महकमे में सुशासन के दावों की खुली पोल: ब्लैकलिस्टेड ‘मेसर्स हरी स्टोर्स धमतरी ‘ को मिला अफसरों का अभयदान; मंत्री और डायरेक्टर के मौन की राज्यपाल से शिकायत, EOW-ACB जांच की मांग पर लोकभवन से कार्रवाई की उम्मीद
रायपुर/प्रवक्ता डॉट कॉम:/ 06 अक्टूबर
छत्तीसगढ़ में ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘पारदर्शी सुशासन’ के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत स्वास्थ्य महकमे के गलियारों में दम तोड़ती नजर आ रही है। जब शासकीय खरीद के कड़े नियम, GeM पोर्टल की गाइडलाइंस और जनरल फाइनेंशियल रूल्स (GFR) सिर्फ कागजों की शोभा बनकर रह जाएं और करोड़ों के टेंडरों को रेवड़ियों की तरह दागी फर्मों में बांट दिया जाए, तो यह महज प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि एक सुनियोजित और संगठित भ्रष्टाचार का सिंडिकेट बन जाता है। प्रवक्ता डॉट कॉम ने इस महकमे में चल रहे फर्जीवाड़े की परतों को लगातार उजागर किया है। अब इस पूरे सिंडिकेट को बेनकाब करने के लिए मामला सीधे राज्य के संवैधानिक प्रमुख यानी महामहिम राज्यपाल महोदय के दरबार तक पहुंच चुका है।
विदित हो कि 3 वर्ष की आधिकारिक ब्लैकलिस्ट अवधि के दौरान मेसर्स हरी स्टोर्स (धमतरी) द्वारा जांजगीर-चांपा में ₹5 करोड़ से अधिक का टेंडर और देश के प्रतिष्ठित सार्वजनिक उपक्रम NMDC लिमिटेड में ₹16.76 करोड़ का वर्क ऑर्डर हथियाने के महाघोटाले की शिकायत महीनों पहले संबंधित जिलों के कलेक्टरों, डायरेक्टर (स्वास्थ्य सेवाएं) और हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय को दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ सौंपी गई थी। मंत्री कार्यालय से उच्च स्तरीय जांच का भरोसा मिलने के बावजूद दिन बीतते गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई शुरू नहीं हुई। रसूखदार अधिकारियों और दागी ठेकेदार को शासन स्तर पर बचाने की इस साज़िश के खिलाफ आज राजभवन पहुंचकर महामहिम राज्यपाल के नाम औपचारिक ज्ञापन व शिकायत पत्र सौंपा गया। राज्यपाल सचिवालय ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए ईओडब्ल्यू (EOW) व एसीबी (ACB) स्तर से निष्पक्ष जांच कराकर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने का स्पष्ट आश्वासन दिया है।

क्या है करोड़ों का यह संगठित खेल? समझिए कड़ियां
सीमेंस का फर्जी सर्टिफिकेट और 3 साल की ब्लैकलिस्टिंग
विवादित फर्म मेसर्स हरी स्टोर्स, धमतरी द्वारा जिला अस्पताल कोंडागांव में सीमेंस (Siemens) कंपनी का फर्जी और कूट-रचित ऑथराइजेशन सर्टिफिकेट लगाया गया था। अपराध सिद्ध होने पर सिविल सर्जन कोंडागांव ने आदेश क्रमांक 401 (दिनांक 17/06/2022) के तहत फर्म को 17 जून 2022 से 16 जून 2025 तक 3 वर्ष के लिए शासकीय निविदाओं से पूर्णतः ब्लैकलिस्ट कर दिया था।
जांजगीर-चांपा में ₹5 करोड़ का फर्जी टेंडर
प्रतिबंध अवधि के ठीक बीच (वित्तीय वर्ष 2024-25) में सीएमएचओ कार्यालय जांजगीर-चांपा में जिला अस्पताल व अकलतरा सीएचसी हेतु Modular OT व AMC/CMC का टेंडर निकाला गया। हरी स्टोर्स ने खुद के ब्लैकलिस्ट होने की बात छिपाई और “गैर-प्रतिबंधित होने” का फर्जी शपथ पत्र देकर ₹5 करोड़ से अधिक का टेंडर हासिल कर लिया। निविदा समिति ने बिना किसी भौतिक या दस्तावेजी सत्यापन के आंख मूंदकर इस दागी फर्म को कार्यादेश थमा दिया।
NMDC में ₹16.76 करोड़ के दो बड़े कार्यादेश
इसी ब्लैकलिस्ट अवधि में फर्म ने सार्वजनिक उपक्रम NMDC लिमिटेड को भी अंधेरे में रखकर किरन्दुल प्रोजेक्ट अस्पताल (₹5,14,76,419.95) और बचेली प्रोजेक्ट अस्पताल (₹11,61,38,841.00) के भारी-भरकम टेंडर हासिल किए, जहां दरों को मनमाने ढंग से बढ़ाकर सरकारी उपक्रम को करोड़ों की चपत लगाई गई।
RTI में फूटा भांडा — बैक-डेटेड फर्जी ‘दोषमुक्ति पत्र’ का षड्यंत्र
जब शिकायतें शुरू हुईं, तो फर्म को बचाने के लिए कोंडागांव के तत्कालीन सिविल सर्जन ने अपने पद का दुरुपयोग कर बैक-डेटेड फर्जी ‘दोषमुक्ति पत्र’ (क्रमांक 663 दिनांक 30/08/2024) जारी कर दिया। लेकिन सूचना के अधिकार (RTI) में जिला अस्पताल कोंडागांव ने पत्र क्रमांक 1187 (दिनांक 09/2025 व 30/09/2025) में लिखित खुलासा कर दिया कि अस्पताल के पूरे रिकॉर्ड में ब्लैकलिस्ट हटाने या दोबारा जांच से संबंधित कोई भी आदेश या दस्तावेज मौजूद ही नहीं है। यानी पत्र पूरी तरह कूट-रचित था।

ज्ञापन में EOW और ACB जांच की प्रमुख मांगें:
महामहिम राज्यपाल महोदय को सौंपे गए विस्तृत शिकायत पत्र में विभागीय जांच के बजाय स्वतंत्र जांच एजेंसियों से निम्नलिखित विधिक बिंदुओं पर पड़ताल कराने की मांग की गई है:
EOW/ACB द्वारा आपराधिक जांच
चूंकि विभाग के शीर्ष अधिकारियों की संलिप्तता के कारण महीनों से जांच अटकी हुई है, इसलिए पूरे वित्तीय गबन और कूट-रचना की जांच राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंपी जाए।
कार्यादेशों का तत्काल निरस्तीकरण
जांजगीर-चांपा सीएमएचओ कार्यालय के ₹5 करोड़ के कार्यादेश तथा NMDC बचेली व किरन्दुल के टेंडरों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
भुगतानों पर रोक व 18% ब्याज सहित रिकवरी
फर्म के आगामी समस्त भुगतानों पर स्टे लगाकर पूर्व में आहरित करोड़ों रुपये की शासकीय राशि की भू-राजस्व बकाया की भांति कड़ी रिकवरी की जाए।
नामजद एफआईआर (FIR) व निलंबन
शासन के साथ धोखाधड़ी, फर्जी शपथ पत्र प्रस्तुत करने और शासकीय कूट-रचना के जुर्म में मेसर्स हरी स्टोर्स के संचालक, तत्कालीन सिविल सर्जन कोंडागांव, CMHO जांजगीर-चांपा व संबंधित निविदा समिति के विरुद्ध BNS की सुसंगत धाराओं में तत्काल FIR दर्ज हो तथा संलिप्त अधिकारियों को निलंबित किया जाए।
आजीवन प्रतिबंध (Permanent Debar)
उक्त फर्म और इसके सिस्टर कंसर्न्स को राज्य के समस्त विभागों की निविदाओं से स्थायी रूप से काली सूची में डाला जाए।
राजभवन द्वारा शिकायत का संज्ञान लेकर जांच का भरोसा दिए जाने के बाद अब स्वास्थ्य महकमे के उन रसूखदारों में खलबली मच गई है जो अब तक फाइलों को दबाकर बैठे थे। प्रवक्ता डॉट कॉम इस मामले की हर विधिक प्रगति और जिम्मेदारों के चेहरों को लगातार बेबाकी से जनता के सामने लाता रहेगा।






