ई-अटेंडेंस के नाम पर शिक्षकों का वेतन काटना और दंडात्मक कार्रवाई अनुचित, आदेश तत्काल निरस्त हों: म.प्र. शिक्षक संघ
स्कूल शिक्षा मंत्री उदयप्रताप सिंह को सौंपा ज्ञापन, तकनीकी खामियों के लिए शिक्षकों को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं: संघ, आदेश निरस्त न होने पर संगठन करेगा देशव्यापी विरोध
भोपाल प्रवक्ता.कॉम 7 जुलाई 2026
भोपाल, 07 जुलाई 2026। मध्यप्रदेश शिक्षक संघ ने प्रदेश के लगभग तीन लाख शिक्षक-शिक्षिकाओं की ई-अटेंडेंस (e-Attendance) को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी नए आदेशों पर गंभीर आपत्ति व्यक्त की है। संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में प्रदेश के स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री उदयप्रताप सिंह को एक ज्ञापन सौंपकर दंडात्मक आदेशों को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला और संघ की आपत्ति?

मध्यप्रदेश शिक्षक संघ ने 01 जुलाई 2026 को जारी उस आदेश का कड़ा विरोध किया है, जिसमें ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने पर शिक्षकों के वेतन में कटौती करने तथा संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) के विरुद्ध अनुशासनात्मक व निलंबन की कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. क्षत्रवीर सिंह राठौर, प्रदेश महामंत्री राकेश गुप्ता एवं प्रांतीय कोषाध्यक्ष विनोद कुमार पुनी ने संयुक्त बयान में कहा:
“जब विभाग स्वयं यह स्वीकार कर चुका है कि प्रदेश के 90 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में ई-अटेंडेंस सफलतापूर्वक दर्ज हो रही है और कई जिलों में यह आंकड़ा 94 से 95 प्रतिशत तक है, तो फिर शेष 5-10 प्रतिशत तकनीकी समस्याओं के लिए शिक्षकों को बलि का बकरा बनाना कहाँ का न्याय है?”
शिक्षकों के सम्मान और व्यावहारिक समस्याओं का हवाला



शिक्षक संघ ने साफ किया कि कई बार नेटवर्क न होना, मोबाइल में तकनीकी खराबी, इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या, बिजली गुल रहना या फिर अटेंडेंस ऐप में ही बग (त्रुटि) होने के कारण उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। ऐसी व्यावहारिक दिक्कतों के लिए शिक्षकों को दोषी मानकर उनका वेतन काटना राष्ट्र निर्माताओं के सम्मान के सर्वथा विपरीत है।
मध्यप्रदेश शिक्षक संघ की प्रमुख मांगें:
- संसाधनों की उपलब्धता: विद्यालयों में पर्याप्त नेटवर्क, बिजली और आवश्यक तकनीकी ढांचा सुनिश्चित किए बिना ई-अटेंडेंस को वेतन से न जोड़ा जाए।
- ऑफलाइन उपस्थिति को मान्यता: तकनीकी खराबी की स्थिति में ऑफलाइन (रजिस्टर) उपस्थिति को पूरी तरह वैध माना जाए।
- संस्था प्रमुख को अधिकार: आपातकालीन परिस्थितियों में स्कूल के संस्था प्रमुख (Principal/HM) द्वारा उपस्थिति प्रमाणित करने की व्यवस्था बहाल हो।
- समान नीति लागू हो: ई-अटेंडेंस की यह अनिवार्य व्यवस्था केवल स्कूल शिक्षा विभाग तक सीमित न रखकर प्रदेश के सभी सरकारी विभागों में समान रूप से लागू की जाए।
मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की अपील
विज्ञप्ति के अंत में प्रदेश महामंत्री राकेश गुप्ता ने बताया कि संघ ने माननीय शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह से आग्रह किया है कि प्रदेश के लाखों शिक्षकों में व्याप्त असंतोष, आक्रोश और भय के माहौल को समाप्त करने के लिए इस तानाशाही आदेश को तत्काल स्थगित या निरस्त किया जाए, ताकि शिक्षक बिना किसी मानसिक दबाव के पूर्ण समर्पण के साथ बच्चों को शिक्षित करने के अपने मूल दायित्व का निर्वहन कर सकें।
– ब्यूरो रिपोर्ट, भोपाल





