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अजय सिंह बिष्ट से ‘बुलडोजर बाबा’ तक: सीएम योगी के वो किस्से जो आपको हैरान कर देंगे!

सी एम योगी :संन्यासी की वो 5 कहानियां, जिन्होंने बदल दी यूपी की सियासत ​योगी आदित्यनाथ @ 54: गणित के छात्र से देश के सबसे चर्चित मुख्यमंत्री बनने का सफर

गोरखपुर/लखनऊ: प्रवक्ता. कॉम 5 जून 2026

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। 5 जून 1972 को उत्तराखंड के यमकेश्वर में जन्मे अजय सिंह बिष्ट से लेकर देश के सबसे बड़े राज्य के ‘महाराज जी’ और ‘बुलडोजर बाबा’ बनने तक का उनका सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है।
​उनके इस खास दिन पर आइए नजर डालते हैं उनके जीवन से जुड़े कुछ ऐसे ही रोचक और अनसुने किस्सों पर, जो उन्हें देश की राजनीति का सबसे अनोखा चेहरा बनाते हैं।
कोटद्वार से गोरखपुर:

क संन्यासी की शुरुआत


​क्या आप जानते हैं कि बीएससी (B.Sc) गणित की पढ़ाई करने वाले अजय सिंह बिष्ट कभी कोटद्वार में रहते थे? गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ से उनकी मुलाकात ऋषिकेश में हुई थी। महज 22 साल की उम्र में उन्होंने सांसारिक जीवन छोड़ दिया और संन्यास धारण कर लिया। इसी के साथ अजय सिंह बिष्ट हमेशा के लिए ‘योगी आदित्यनाथ’ बन गए।
​.26 साल की उम्र में ‘माननीय’ सांसद
​योगी आदित्यनाथ के नाम भारतीय राजनीति में एक अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है। साल 1998 में जब वे पहली बार गोरखपुर से लोकसभा चुनाव जीते, तो उनकी उम्र महज 26 साल थी। वह 12वीं लोकसभा के सबसे युवा सांसद थे। इसके बाद गोरखपुर की जनता ने लगातार 5 बार उन्हें अपना सांसद चुना।
​’नो-बर्थडे’ पॉलिसी
​योगी आदित्यनाथ का आज जन्मदिन जरूर है, लेकिन वह खुद कभी अपना जन्मदिन नहीं मनाते। नाथ संप्रदाय की परंपरा के अनुसार संन्यासी अपने अतीत और जन्म को पीछे छोड़ देते हैं। हालांकि, उनके समर्थक इस दिन को ‘हिंदू स्वाभिमान दिवस’ या सेवा कार्यों के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं।
​योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या: ‘क्विक फैक्ट्स’
​मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद भी योगी आदित्यनाथ की साधु वाली दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं आ

समय गतिविधि
सुबह 4:00 बजे सोकर उठना और योग-ध्यान
सुबह 5:00 बजे गोरखनाथ मंदिर में पूजा-पाठ और गऊ सेवा (गायों को गुड़-चना खिलाना)
सुबह 9:00 बजे से जनता दरबार और सरकारी फाइलों का निपटारा
भोजन बेहद सादा (उबली सब्जियां, खिचड़ी या पपीता)
जानवरों से खास लगाव:

योगी आदित्यनाथ की गायों और कुत्तों (विशेषकर उनके पालतू डॉग ‘कालू’) के साथ तस्वीरें अक्सर वायरल होती हैं। कहा जाता है कि जब वे लखनऊ या दिल्ली से वापस गोरखपुर आते हैं, तो उनके पालतू जानवर दूर से ही उनकी आहट पहचान लेते हैं।
​’बुलडोजर बाबा’ की सोशल मीडिया पर धूम
​ट्विटर (X) से लेकर इंस्टाग्राम तक, आज सुबह से ही i ट्रेंड कर रहा है। देश-विदेश से लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। सख्त मिजाज और ताबड़तोड़ फैसलों के लिए मशहूर सीएम योगी को सोशल मीडिया पर मीम्स और रील्स में ‘बुलडोजर बाबा’ के नाम से खूब शेर-ओ-शायरी के साथ विश किया जा रहा है।

योगी आदित्यनाथ के जीवन की पांच बड़ी कहानियां जिसने यूपी पॉलिटिक्स की तस्वीर्द बदल दी

1. हिंदू युवा वाहिनी का गठन: बीजेपी से अलग अपनी समानांतर ताकत

​साल 2002 में योगी आदित्यनाथ ने ‘हिंदू युवा वाहिनी’ (HYV) का गठन किया था। यह वह दौर था जब पूर्वांचल की राजनीति में बाहुबलियों का दबदबा था। योगी ने इसके जरिए युवाओं का एक ऐसा मजबूत नेटवर्क खड़ा किया, जो सिर्फ बीजेपी के भरोसे नहीं था। इस संगठन की बदौलत पूर्वांचल में उनका रसूख इतना बढ़ गया कि बीजेपी आलाकमान को भी गोरखपुर क्षेत्र में टिकट बांटने से पहले योगी आदित्यनाथ की सहमति लेनी पड़ती थी। इसने यूपी में ‘हिंदुत्व’ की राजनीति को एक नया आक्रामक आधार दिया।

​2. संसद में रोना: जब व्यवस्था को चुनौती देने वाला संन्यासी भावुक हुआ

​2007 की यह घटना यूपी की राजनीति के इतिहास में दर्ज है। गोरखपुर में हुए सांप्रदायिक तनाव के बाद योगी आदित्यनाथ को गिरफ्तार कर लिया गया था। जेल से छूटने के बाद जब वे लोकसभा पहुंचे, तो सदन में अपनी बात रखते हुए वे रो पड़े। उन्होंने तत्कालीन सपा सरकार पर उनके खिलाफ साजिश रचने और जान का खतरा होने का आरोप लगाया।

बदलाव: इस घटना ने उनके समर्थकों के बीच उनकी छवि को एक ‘पीड़ित लेकिन हार न मानने वाले जुझारू नेता’ के रूप में स्थापित कर दिया। इस सहानुभूति और गुस्से ने पूर्वांचल में उनके राजनीतिक कद को कई गुना बड़ा कर दिया।

​3. 2017 में अचानक सीएम रेस में एंट्री: सबको चौंकाने वाला फैसला

​2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने भारी बहुमत (312 सीटें) तो जीत लिया, लेकिन सीएम चेहरे के लिए मनोज सिन्हा, केशव प्रसाद मौर्य और राजनाथ सिंह जैसे नामों की चर्चा थी। लेकिन ऐन वक्त पर आरएसएस और बीजेपी नेतृत्व ने योगी आदित्यनाथ के नाम पर मुहर लगाकर सबको हैरान कर दिया।

बदलाव: यूपी की राजनीति में दशकों बाद किसी ‘संन्यासी’ को सूबे की कमान मिली। इस फैसले ने साफ कर दिया कि बीजेपी अब राज्य में तुष्टिकरण के बजाय सीधे और प्रखर राष्ट्रवाद-हिंदुत्व के चेहरे पर दांव खेलने के लिए तैयार है।

​4. ‘लॉ एंड ऑर्डर’ का नया मॉडल: एन्काउंटर और ‘बुलडोजर नीति’

​मुख्यमंत्री बनते ही योगी आदित्यनाथ ने यूपी की छवि ‘गुंडाराज’ से मुक्त कराने के लिए सख्त कानून-व्यवस्था का मॉडल अपनाया। अपराधियों की संपत्तियों पर बुलडोजर चलवाना और माफियाओं के खिलाफ सीधे एक्शन लेना उनकी पहचान बन गया।

बदलाव: इससे पहले यूपी में अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोप लगते थे। योगी की इस नीति ने अपराधियों में ऐसा खौफ पैदा किया कि कई गैंगस्टर खुद तख्ती लटकाकर सरेंडर करने थानों में पहुंचने लगे। ‘बुलडोजर’ यूपी की राजनीति में सुशासन और न्याय का एक नया राजनीतिक सिंबल (प्रतीक) बन गया, जिसे बाद में अन्य राज्यों ने भी अपनाया।

​5. ‘नोएडा का अंधविश्वास’ तोड़ना और लगातार दूसरी बार सत्ता

​यूपी की राजनीति में एक पुराना अंधविश्वास था कि जो भी मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के दौरान नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) का दौरा करता है, उसकी कुर्सी चली जाती है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, मायावती और मुलायम सिंह यादव अक्सर इस डर से वहां जाने से बचते थे। लेकिन योगी आदित्यनाथ ने न सिर्फ बार-बार नोएडा का दौरा किया, बल्कि अंधविश्वास को दरकिनार कर विकास कार्यों की समीक्षा की।

बदलाव: साल 2022 के चुनावों में बीजेपी ने शानदार वापसी की और योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरी बार सीएम पद की शपथ ली। उन्होंने न सिर्फ नोएडा का मिथक तोड़ा, बल्कि 37 साल बाद यूपी में लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाले पहले मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रच दिया। इस जीत ने साबित किया कि यूपी की जनता अब जातिगत समीकरणों से ऊपर उठकर ‘सुरक्षा और विकास’ के नाम पर वोट दे रही है।

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