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राष्ट्रीय विचारधारा और नागरिक कर्तव्यों से ही भारत महान बनेगा –स्वप्निल कुलकर्णी

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित क्षेत्र प्रचारक (मध्य क्षेत्र) स्वप्निल कुलकर्णी जी ने कहा कि संघ का कार्य 1925से शुरू होकर आज हम शताब्दी वर्ष में है किसी भी संगठन के लिए 100 वर्ष पुरा कर पाना कठिन है।



प्रवक्ता.कॉम कवर्धा 9 अप्रैल 2026

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत, कवर्धा नगर के कुर्मी क्षत्रिय छात्रावास सभागार, में 8 अप्रैल 2026 को ‘प्रमुख जनगोष्ठी’ का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित क्षेत्र प्रचारक (मध्य क्षेत्र) स्वप्निल कुलकर्णी जी ने कहा कि संघ का कार्य 1925से शुरू होकर आज हम शताब्दी वर्ष में है किसी भी संगठन के लिए 100 वर्ष पुरा कर पाना कठिन है।संघ ने शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन का कार्यक्रम निर्धारित किया है। ये पांच परिवर्तन हैं – स्व का बोध तथा स्वदेशी का उपयोग, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्त्तव्य बोध। पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज और राष्ट्र सशक्त होगा। पंच परिवर्तन के माध्यम से ही आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना की जा सकती है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक किसी भी राष्ट्रीय आपदा में हमेशा सबसे आगे रहते हैं। कोरोना काल में जब बड़ी-बड़ी संस्थाओं ने हाथ खड़े कर दिए, तब संघ के स्वयंसेवक अपने कर्तव्य बोध को समझते हुए सेवा के लिए तत्पर दिखे। संघ का स्वयंसेवक आपदा, महामारी, सामाजिक संकट जैसी विकट परिस्थिति में बिना नाम, यश की चिंता किए सेवा करता है। यही कर्तव्य बोध का जीवंत उदाहरण है।
ध्येय और राष्ट्र निर्माण में हर वर्ग की भूमिका पर प्रकाश डाला
शाश्वत विचारधारा और राष्ट्र का लक्ष्य श्री कुलकर्णी जी ने अपने संबोधन में कहा कि संघ का कार्य कोई नया नहीं है; यह वही विचारधारा है जो हमारे ऋषि-मुनियों ने दी है और जो हमारी परंपरागत हिंदू संस्कृति में रची-बसी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का लक्ष्य स्वयं को बड़ा बनाना नहीं, बल्कि भारत को विश्व का सिरमौर बनाना है। संघ का मूल उद्देश्य भारतीयों के जीवन मूल्यों के स्तर को ऊंचा उठाना है ताकि एक समर्थ राष्ट्र का निर्माण हो सके।


नागरिक कर्तव्य और राष्ट्रीय चेतना
गोष्ठी में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि समाज के प्रत्येक नागरिक के मन में राष्ट्रीय विचारधारा प्रवाहित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना हर नागरिक की प्राथमिकता होनी चाहिए। महापुरुषों का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि वे किसी एक जाति के नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के होते हैं। भारत की विशिष्टता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज देश में जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दिखती है, वह हिंदू समाज की उदारता के कारण ही सुरक्षित है।


उनके सानिध्य में कार्यक्रम का उद्देश्य और शताब्दी वर्ष की कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई।
विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुखों की सहभागिता
इस विशेष गोष्ठी में कृषि, व्यापार, शिक्षा, सामाजिक सेवा, न्याय और प्रशासन जैसे विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख व्यक्ति और प्रबुद्ध जन बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए। विशेष रूप से कृषि क्षेत्र के प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए राष्ट्र निर्माण में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के महत्व को भी रेखांकित किया गया।
प्रमुख जनगोष्ठी में माननीय नगर संघचालक, जिला संघ चालक दुर्ग विभाग संघचालक, प्रांत प्रचारक, दुर्ग विभाग कार्यवाह,जिला कार्यवाह आदि प्रमुख गणमान्य उपस्थित रहे।

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