सुप्रीम कोर्ट में NCTE का बड़ा खुलासा: शिक्षकों की भर्ती और पदोन्नति के लिए TET अनिवार्य, नियमों में कोई ढील नहीं

नई दिल्ली: प्रवक्ता.कॉम
28 जून 2026
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने भारत के उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में एक महत्वपूर्ण शपथ पत्र दाखिल कर शिक्षकों की योग्यता और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है. अंजुमन इशात ए तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य (दीवानी अपील संख्या 1385 / 2025) के मामले में माननीय न्यायालय के आदेश के अनुपालन में यह हलफनामा दायर किया गया है.
NCTE के अवर सचिव रवींद्र सिंह द्वारा दाखिल इस शपथ पत्र के मुख्य बिंदु और उसके आधार पर तैयार विस्तृत रिपोर्ट इस प्रकार है:

1. TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य, गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं
NCTE ने स्पष्ट किया है कि निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के तहत कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना पूरी तरह अनिवार्य है. परिषद ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में शिक्षक की गुणवत्ता के राष्ट्रीय मानकों और बेंचमार्क को बनाए रखने के लिए TET को शामिल किया गया है और इसके साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता.

2. पदोन्नति (Promotion) के लिए भी TET जरूरी




शपथ पत्र में सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही गई है कि NCTE विनियम 2014 (जो 12.11.2014 को अधिसूचित हुआ था) के तहत अब शिक्षकों की सीधी भर्ती के साथ-साथ पदोन्नति (Promotion) के लिए भी TET को न्यूनतम योग्यता के रूप में अनिवार्य किया गया है. विनियमों के अनुसार, कक्षा I से VIII के लिए शिक्षकों की नियुक्ति या पदोन्नति में छूट देने की शक्ति को शिथिल किया गया है, यानी इसमें कोई रियायत नहीं दी जाएगी.
3. किन शिक्षकों को मिली है छूट? (कट-ऑफ तिथियां)
NCTE ने पुराने मामलों और कट-ऑफ तारीखों को लेकर स्थिति साफ की है:
- 03.09.2001 से पहले नियुक्त शिक्षक: प्रचलित भर्ती नियमों के अनुसार यदि कोई शिक्षक 3 सितंबर 2001 से पहले सेवा में नियुक्त हुआ है, तो उसे शिक्षक प्रशिक्षण व्यावसायिक योग्यता के बिना भी छूट के दायरे में समझा जा सकता है.
- 03.09.2001 से 23.08.2010 के बीच नियुक्त शिक्षक: इस अवधि के दौरान नियुक्त शिक्षकों के लिए NCTE विनियम 2001 के अनुसार निर्धारित योग्यता होना आवश्यक है.
- 23.08.2010 और 29.07.2011 के बाद: इस अवधि (जब NCTE ने RTE के तहत अधिसूचना जारी की थी) के बाद नियुक्त या पदोन्नत होने वाले सभी शिक्षकों के लिए TET उत्तीर्ण करना पूरी तरह बाध्यकारी और अनिवार्य है.
4. अप्रशिक्षित शिक्षकों के लिए ‘अंतिम अवसर’ समाप्त
शपथ पत्र में मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) के 3 अगस्त 2017 के पत्र का हवाला दिया गया है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि सभी इन-सर्विस अप्रशिक्षित शिक्षकों को 31 मार्च 2019 तक अपनी न्यूनतम योग्यता (शिक्षक प्रशिक्षण) प्राप्त करनी थी. इस समय सीमा के बाद आवश्यक योग्यता प्राप्त किए बिना सेवा में बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
5. केंद्र सरकार भी TET में नहीं दे सकती छूट
RTE अधिनियम की धारा 23(2) के तहत केंद्र सरकार विशेष परिस्थितियों में राज्यों के अनुरोध पर न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता (जैसे डिप्लोमा या डिग्री) में तो कुछ समय के लिए ढील दे सकती है, लेकिन TET पास करने की शर्त में किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी.
निष्कर्ष:
NCTE के इस रुख से साफ है कि देश में स्कूली शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए शिक्षकों की गुणवत्ता पर कड़ा रुख अपनाया जा रहा है. अब बिना TET पास किए न तो प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में नए शिक्षकों की भर्ती हो सकेगी और न ही पुराने कार्यरत शिक्षकों को अगली कक्षा में पदोन्नति (प्रमोशन) मिल पाएगी.





