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सहायक संचालक डी.जी. पात्रा बने साजा के नए बीईओ, अचानक हुए तबादले से शिक्षक समुदाय में आक्रोश ईमानदार अधिकारी सिस्टम को हजम नहीं होते

विभाग ने उन अधिकारियों को अछूता छोड़ दिया है जो पिछले 10 से 20 सालों से एक ही जगह पर सहायक संचालक के पद पर जमे हुए हैं, जबकि महज 3 साल से भी कम समय पूरा करने वाले डी.डी. पात्रा को अचानक हटा दिया गया।

कबीरधाम /पंडरिया प्रवक्ता.कॉम

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26 जून 2026

स्कूल शिक्षा विभाग में हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल के तहत कबीरधाम जिले के शिक्षा विभाग में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अपनी ईमानदारी और कड़े फैसलों के लिए मशहूर सहायक संचालक डी.जी. पात्रा का स्थानांतरण कर उन्हें साजा का नया विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) नियुक्त किया गया है। हालांकि, उनके इस अचानक हुए तबादले ने कबीरधाम जिले के शिक्षक समुदाय और विभाग के भीतर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
​कबीरधाम में रहा शानदार और बेदाग सफर
​श्री डी.जी. पात्रा का कबीरधाम जिले से गहरा नाता रहा है। वे इस जिले में पहली बार सहायक खंड शिक्षा अधिकारी (ABEO) के पद पर पदांकित हुए थे। इसके बाद विभाग में उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए उन्हें पदोन्नति (प्रमोशन) मिली और वे इसी जिले में सहायक संचालक शिक्षा के पद पर कार्यरत हुए। अपने पूरे सेवाकाल के दौरान वे अपने बेहतरीन कार्यों, कड़े प्रशासनिक अनुशासन और पूरी तरह से निष्पक्ष कार्यप्रणाली के लिए हमेशा चर्चा में रहे।

पंडरिया के सुदूर वनांचल से शुरू हुआ था सफर

​श्री डी.जी. पात्रा का कबीरधाम जिले से गहरा नाता रहा है। वे इस जिले में सबसे पहले पंडरिया में बतौर सहायक खंड शिक्षा अधिकारी (ABEO) पदस्थ हुए थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पंडरिया ब्लॉक के अत्यंत सुदूर वनांचल (पहाड़ी और जंगली) क्षेत्रों का दौरा कर वहां की बदहाल स्कूली शिक्षण व्यवस्था को पटरी पर लाया और उसमें व्यापक सुधार किया। इसके बाद विभाग में उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए उन्हें पदोन्नति (प्रमोशन) मिली और वे इसी जिले में सहायक संचालक शिक्षा के पद पर कार्यरत हुए। अपने पूरे सेवाकाल के दौरान वे अपने बेहतरीन कार्यों, कड़े प्रशासनिक अनुशासन और पूरी तरह से निष्पक्ष कार्यप्रणाली के लिए हमेशा चर्चा में रहे।


​सूचना के अधिकार (RTI) का प्रभावी क्रियान्वयन
​सहायक संचालक के रूप में श्री पात्रा ने कार्यालयीन कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए। उनके कार्यकाल में सूचना के अधिकार (RTI) का कड़ाई और प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया गया, जिससे आम जनता और विभाग के बीच पारदर्शिता बढ़ी। लेकिन क्षेत्र में चर्चा है कि उनकी यही सख्ती, निष्पक्षता और ईमानदारी कुछ लोगों को रास नहीं आई, जो अंततः उनके अचानक हुए तबादले की वजह बनी।
​शिक्षकों ने उठाए सवाल: “सख्ती और ईमानदारी पड़ी भारी”
​श्री पात्रा के अचानक हुए इस स्थानांतरण से कबीरधाम जिले के शिक्षक बेहद आहत और निराश हैं। शिक्षकों का कहना है कि जिले को ऐसा ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ और निष्पक्ष अधिकारी मिलना बेहद मुश्किल है। शिक्षक समुदाय के भीतर इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि विभाग ने उन अधिकारियों को अछूता छोड़ दिया है जो पिछले 10 से 20 सालों से एक ही जगह पर सहायक संचालक के पद पर जमे हुए हैं, जबकि महज 3 साल से भी कम समय पूरा करने वाले डी.डी. पात्रा को अचानक हटा दिया गया।
शिक्षकों ने दी शुभकामनाएं


​तबादले की खबर के बाद जिले के सैकड़ों शिक्षकों ने श्री पात्रा आत्मीयता से उनके कार्यकाल को याद किया है और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रमुख शिक्षकों में मोहन सिंह राजपूत, चंद्र प्रकाश राजपूत, राजेश कुमार साहू, कलीराम चंद्राकर, उमेश सिंह, बलवंत सिंह राजपूत और दीपक नेताम ,दीपक चंद्रवंशी अखिलेश चंद्रवंशी, सुरेश चन्द्रवंशी , राजेश चंद्राकर जैसे कई शिक्षकों ने कहा कि श्री पात्रा ने हमेशा नियम और निष्पक्षता का साथ दिया, उनके जाने से जिले के शिक्षा विभाग को एक बड़ी क्षति हुई है।

जहां भी रहेंगे सदैव साथ खड़े होंगे – इस स्थानांतरण के संबंध में जो भी सरकार को उचित लगा किया ,लेकिन ऐसे कई अधिकारी जो सालों से स्कूल का मुंह नहीं देखे हैं और बिना पद की रिक्ति होते हुए सहायक संचालक बने हैं उनको यहां से हटाया जाना था । शिक्षक संगठन के प्रतिनिधि नरेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा है कि व्यक्तिगत तौर पर पात्रा को जानते हैं उनकी ईमानदारी और कर्त्तव्यनिष्ठा पर आज तक कोई सवाल तक नहीं उठा पाया है। उनको शुभकामना है उनके साथ प्रत्येक परिस्थिति में खड़े रहेंगे। समय एक जैसा नहीं रहता ।

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