समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़: 9 महीने में मिला सिर्फ 3 बार वेतन, कर्मचारियों का फूटा गुस्सा
छत्तीसगढ़ में 33 जिलों के 150 कर्मचारी बेबस: तीन महीने में एक बार वेतन देने की बनी नई प्रथा
रायपुर प्रवक्ता.कॉम 4 अक्टूबर 2026
राज्य में समग्र शिक्षा योजना के तहत 33 जिलों में कार्यरत लगभग 150 कर्मचारियों को पिछले नौ महीनों से गंभीर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि जनवरी 2026 से सितंबर 2026 के बीच उन्हें केवल तीन बार ही वेतन का भुगतान किया गया है। लंबे समय से वेतन रुकने के कारण कर्मचारियों को अपने दैनिक खर्च और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्ज लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
कर्मचारियों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि हर तीन महीने में एक बार वेतन देने की एक अनुचित परिपाटी बन गई है। नियमित मानदेय न मिलने से कर्मचारियों में गहरा मानसिक तनाव व्याप्त है और इसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य तथा पारिवारिक जीवन पर पड़ रहा है।
संविधान के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि सरकार और संबंधित विभाग की यह अनदेखी भारतीय संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है:
अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार): समान कार्य करने वाले कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण और मनमाना व्यवहार किया जा रहा है।
अनुच्छेद 16 (अवसर की समानता): सेवा शर्तों और रोजगार के अधिकारों में विषमता पैदा की जा रही है।
अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार): समय पर वेतन न देकर कर्मचारियों के सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार और अस्तित्व पर आघात किया जा रहा है।
पीड़ित कर्मचारियों ने शासन-प्रशासन से बकाया वेतन के तुरंत भुगतान की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नियमित वेतन व्यवस्था बहाल नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।





