ज्ञान बांटने वाले खुद अंधेरे में: जानिए क्यों सेवानिवृत्ति के बाद भी खाली हाथ रहने को मजबूर हैं एल.बी. संवर्ग के शिक्षक”
लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ द्वारा जारी सेवानिवृत्ति आदेश (13 अक्टूबर 2026) में 161 में से 15 व्याख्याता एल.बी. संवर्ग के शामिल हैं। यह आदेश इन शिक्षकों के लिए खुशियों के बजाय बुढ़ापे की चिंता लेकर आया है।
रायपुर: प्रवक्ता.कॉम 14 अक्टूबर 2026
“जिस शिक्षक ने पूरी जिंदगी ब्लैकबोर्ड पर ज्ञान का उजाला फैलाया और पीढ़ियों का भविष्य संवारा, आज सेवानिवृत्ति के मोड़ पर खड़े होकर उसके अपने जीवन में तंगहाली और अनिश्चितता का अंधेरा छा गया है।” यह पंक्तियां छत्तीसगढ़ के उन एल.बी. (LB) संवर्ग के शिक्षकों की मार्मिक पीड़ा को बयान करती हैं, जो वर्षों की निष्ठावान सेवा के बाद भी एक-एक पाई के लिए मोहताज होने की कगार पर खड़े हैं।
हाल ही में लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ द्वारा जारी सेवानिवृत्ति आदेश (13 अक्टूबर 2026) में 161 में से 15 व्याख्याता एल.बी. संवर्ग के शामिल हैं। यह आदेश इन शिक्षकों के लिए खुशियों के बजाय बुढ़ापे की चिंता लेकर आया है।
डीपीआई द्वारा जारी सूची में 15 व्याख्याता एल बी संवर्ग के हैं
एल.बी. संवर्ग के शिक्षक (व्याख्याता एल.बी.
इस आदेश में कुल 15 शिक्षक एल.बी. संवर्ग के हैं (जैसे- श्रीमती अनुमाला सिन्हा, श्रीमती कल्याणी एकाक्का, श्री शैलेन्द्र कुमार सिंह, श्री मयाराम राठिया, श्री सुरेन्द्र सिंह परिहार, श्री रामलाल देवांगन, श्री महेन्द्र प्रताप सिंह तंवर, श्री दुब्बा लक्ष्मैया, श्रीमती सरिता बर्मन, श्रीमती सुनीता शेण्डे, श्री रमाशंकर तिवारी, श्रीमती मंजू साहू, श्रीमती सुदामा देवी जायसवाल, श्री मुनेश कुमार साहू, आदि)।
अन्य संवर्ग / नियमित शिक्षक
एल.बी. संवर्ग को छोड़कर बाकी बचे 146 शिक्षक नियमित/अन्य संवर्ग के व्याख्याता हैं।
संविलियन के बाद भी अधूरी आस, पुरानी सेवा की गणना न होने से मायूसी
पंचायत एवं नगरीय निकाय संवर्ग से शिक्षा विभाग में संविलियन होने के बावजूद एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि उनकी प्रथम नियुक्ति तिथि से की गई पुरानी सेवाओं (पंचायत/निकाय सेवाकाल) को पेंशन व अन्य सेवा लाभों के लिए नहीं गिना जा रहा है।
केवल संविलियन के बाद की सीमित अवधि की सेवा को ही आधार बनाए जाने से सेवानिवृत्त हो रहे इन शिक्षकों को न तो सम्मानजनक पुरानी पेंशन (OPS) का पूरा लाभ मिल पा रहा है और न ही ग्रेच्युटी व अन्य सेवानिवृत्ति लाभ। नतीजतन, जीवनभर ज्ञान बांटने वाले ये शिक्षक रिटायरमेंट के बाद खाली हाथ रहने और बुढ़ापे में आर्थिक तंगहाली झेलने को मजबूर हैं।
शिक्षकों की गुहार: क्या यही है जीवनभर की सेवा का इनाम?
एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों और संघों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन के स्वर्णिम 20-25 वर्ष शासकीय शालाओं में शिक्षा की ज्योति जलाने में बिता दिए। लेकिन अब जब आराम और सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा की उम्र आई है, तब नीतियों और तकनीकी कमियों का बहाना बनाकर उनकी पुरानी सेवा को शून्य माना जा रहा है।
शिक्षकों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि उनकी प्रथम नियुक्ति तिथि से पूरी सेवा अवधि की गणना कर पेंशन व अन्य लाभ दिए जाएं, ताकि शिक्षा की अलख जगाने वाले ये राष्ट्रनिर्माता सम्मानपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर सकें और उनके जीवन में छाया यह अंधेरा दूर हो सके।






