श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026: आज रोहिणी नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में मनेगा जन्मोत्सव, जानें निशीथ काल पूजा का सटीक मुहूर्त व नियम

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 4 अगस्त 2026
देशभर में आज, 4 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष जन्माष्टमी पर करीब 15 साल बाद अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का एक साथ विशेष संयोग बन रहा है, जिसे शास्त्रों में अत्यंत फलदायी और दुर्लभ माना गया है।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि (रात 12 बजे) रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। यही कारण है कि जन्माष्टमी की मुख्य पूजा रात में निशीथ काल के दौरान की जाती है।
पूजा के मुख्य शुभ मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार मध्यरात्रि की पूजा का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। आज पूजन के विशेष मुहूर्त इस प्रकार हैं:
निशीथ काल (मध्यरात्रि पूजा): रात 11:57 बजे से 5 सितंबर की रात 12:43 बजे तक
पूजा की कुल अवधि: 46 मिनट
मध्यरात्रि का मुख्य क्षण (जन्म समय): रात 12:20 बजे
दिन का अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक
पूजा विधि और भोग के नियम
मध्यरात्रि में लड्डू गोपाल के जन्म के समय भक्त विशेष विधि-विधान से पूजन संपन्न करते हैं:
अभिषेक व श्रृंगार: रात 12:00 बजे कान्हा का शंख में गंगाजल और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) भरकर अभिषेक करें। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र और आभूषण पहनाएं।
विशेष भोग: बाल गोपाल को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, पंचामृत और तुलसी दल का भोग अवश्य लगाएं। ध्यान रखें कि बिना तुलसी दल के कान्हा भोग स्वीकार नहीं करते।
व्रत पारण का समय: जो श्रद्धालु पूरे दिन का उपवास रख रहे हैं, वे 5 सितंबर की सुबह रोहिणी नक्षत्र अथवा तिथि समाप्त होने के बाद पारण कर सकते हैं।
क्यों खास है इस बार की जन्माष्टमी?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष जन्माष्टमी पर बन रहा ग्रहों का संयोग श्रद्धालुओं के लिए समृद्धि और मनोकामना पूर्ति लाने वाला है। मान्यता है कि निशीथ काल के 46 मिनट के इस पावन मुहूर्त में भगवान श्री हरि विष्णु के बाल रूप की सच्चे मन से पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-शांति आती है।





