विशेष विश्लेषण: साय सरकार के काम पर क्या सोचते हैं छत्तीसगढ़ के कर्मचारी?
छत्तीसगढ़ की राजनीति में सरकारी कर्मचारी हमेशा से एक बड़ा 'वोट बैंक' और 'ओपिनियन मेकर' रहे हैं। वर्तमान सरकार के कामकाज को लेकर कर्मचारियों की राय को दो हिस्सों में देखा जा सकता है—'मिली हुई राहत' और 'अधूरी उम्मीदें'।
रायपुर प्रवक्ता.कॉम 2 जन 2026
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कामकाज को लेकर प्रदेश के करीब 5 लाख सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच एक मिला-जुला माहौल है। एक तरफ जहां सरकार ने पिछले कुछ महीनों में कुछ बड़े नीतिगत फैसले लेकर कर्मचारियों को खुश करने की कोशिश की है, वहीं दूसरी तरफ कई पुरानी और बुनियादी मांगें अभी भी लंबित हैं, जिससे कर्मचारी संगठनों में सुगबुगाहट और नाराजगी दोनों बरकरार है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों, सरकार के रुख और जमीनी हकीकत का एक विस्तृत विश्लेषण नीचे दिया गया है:
विशेष विश्लेषण: साय सरकार के काम पर क्या सोचते हैं छत्तीसगढ़ के कर्मचारी?
छत्तीसगढ़ की राजनीति में सरकारी कर्मचारी हमेशा से एक बड़ा ‘वोट बैंक’ और ‘ओपिनियन मेकर’ रहे हैं। वर्तमान सरकार के कामकाज को लेकर कर्मचारियों की राय को दो हिस्सों में देखा जा सकता है—’मिली हुई राहत’ और ‘अधूरी उम्मीदें’।
सरकार के वे फैसले जिनसे कर्मचारियों को मिली राहत
महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कर्मचारियों के एक बड़े असंतोष को दूर करते हुए महंगाई भत्ते को केंद्रीय दर के समान करने का फैसला किया। सरकार ने डीए को 55% से बढ़ाकर 58% करने की घोषणा की, जिससे 5 लाख से अधिक नियमित कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की जेब में सीधा फायदा पहुंचा है।
शिक्षकों की पुरानी सेवा की गणना
शिक्षकों की पुरानी सेवा की गणना (OPS संविलियन): प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख शिक्षाकर्मियों/शिक्षकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई। ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) का लाभ देने के लिए संविलियन (Merger) से पहले की उनकी शिक्षाकर्मी काल की सेवाओं को भी जोड़ने के। शिक्षक कोर्ट से लेकर सड़क तक जद्दोजहद कर रहे हैं लेकिन बात नहीं बन पाई है।
चुनावी आचरण नियमों पर यू-टर्न: हाल ही में सरकार ने एक सर्कुलर जारी कर कर्मचारियों के सामाजिक / सांस्कृतिक संगठनों/ के पदों पर रहने को लेकर पाबंदी दोहराई थी, लेकिन विपक्ष और कर्मचारी संघों के कड़े विरोध के बाद सरकार ने 24 घंटे के भीतर इस आदेश को वापस ले लिया। इसे कर्मचारियों की एकजुटता के दबाव के रूप में देखा गया।
‘जायज मांगें’ जो अब भी बनी हैं आंदोलन की वजह
कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर प्रदेश में लगातार 10 से 11 सूत्रीय मांगों को लेकर जिला और ब्लॉक मुख्यालयों पर प्रदर्शन (जैसे मार्च 2026 में हुए भोजन अवकाश प्रदर्शन) होते रहे हैं। कर्मचारियों का मानना है कि उनकी निम्नलिखित जायज मांगों पर सरकार केवल आश्वासन दे रही है:
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें वर्तमान स्थिति / पेंच
अनियमित / संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण
अनियमित और संविदा कर्मियों का नियमितीकरण चुनाव पूर्व भाजपा ने इसका वादा किया था, लेकिन अभी तक इस पर ठोस नीति नहीं बनी है।
देय तिथि से महंगाई भत्ता और लंबित एरियर भुगतान
पेंशनभोगियों और कर्मचारियों का एरियर (Arrears) सातवें वेतनमान के लंबित एरियर और पिछले डीए के एरियर के भुगतान की मांग अधूरी है।
सेवा निवृति आयु सीमा में वृद्धि
सेवानिवृत्ति आयु 62 से 65 वर्ष करना विभागों में मैनपावर की कमी को देखते हुए कर्मचारी इसे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, जो लंबित है।
पंचायत कर्मियों का दर्जा
पंचायत सचिवों का शासकीयकरण सालों से कार्यरत पंचायत सचिवों को पूरी तरह शासकीय कर्मचारी का दर्जा देने की मांग पर फैसला बाकी है।
बायोमेट्रिक (आधार बेस्ड) अटेंडेंस का विरोध
जमीनी स्तर और दूरदराज के इलाकों में नेटवर्क की समस्या के कारण कर्मचारी इस व्यवस्था को व्यावहारिक नहीं मान रहे हैं।
कर्मचारी संघों का स्टैंड:
“सरकार ने डीए बढ़ाकर और शिक्षकों की मांगें मानकर अच्छी शुरुआत की है, लेकिन जब तक दैनिक वेतन भोगी, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और भत्तों के एरियर पर कमेटी की रिपोर्ट आकर लागू नहीं होती, तब तक कर्मचारियों का पूर्ण संतोष पाना मुश्किल है।”
निष्कर्ष: आगे क्या होगा?
साय सरकार ने किसानों के लिए “कृषक कल्याण वर्ष” और धान बोनस जैसी योजनाओं से ग्रामीण वोटर्स को तो साधा है, लेकिन शहरी और प्रशासनिक मशीनरी यानी सरकारी कर्मचारियों को पूरी तरह संतुष्ट करने के लिए अभी ‘नियमितीकरण’ और ‘लंबित एरियर’ जैसे कठिन फैसलों पर मुहर लगानी होगी। सरकार ने बाकी मांगों के समाधान के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने की बात कही है, जिस पर कर्मचारियों की नजरें टिकी हुई हैं।






