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छत्तीसगढ़ के ‘चावल वाले बाबा’ सादगी, संघर्ष और सुशासन का पर्याय – डॉ. रमन सिंह

​राजनादगांव/ कबीरधाम

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विजय सिंह ठाकुर

प्रवक्ता.कॉम 15 अक्टूबर 2026

​छत्तीसगढ़ की राजनीति में जब भी विकास, स्थिरता और सुशासन की बात होती है, तो एक चेहरा सहज ही जनमानस के सामने उभर आता है—डॉ. रमन सिंह। पेशे से चिकित्सक, विचारों से राष्ट्रसेवक और कार्यशैली से जननायक, डॉ. रमन सिंह का व्यक्तित्व भारतीय राजनीति की उन विरली मिसालों में से एक है जिन्होंने सादगी और सौम्यता के साथ नेतृत्व के नए आयाम स्थापित किए। आज उनके जन्मदिन के इस पावन अवसर पर उनके राजनीतिक संघर्ष, अद्वितीय कार्यप्रणाली और छत्तीसगढ़ के निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान का स्मरण करना प्रासंगिक ही नहीं, बल्कि प्रेरणादायी भी है।

​ आयुर्वेद चिकित्सक से जनसेवक तक का संघर्षपूर्ण सफर

​15 अक्टूबर 1952 को कवर्धा के एक किसान परिवार में जन्मे डॉ. रमन सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद आयुर्वेदिक चिकित्सा की उपाधि प्राप्त की। एक चिकित्सक के रूप में उन्होंने हमेशा गरीबों और वंचितों के स्वास्थ्य की चिंता की। ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज करते हुए उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति के दर्द को बहुत करीब से महसूस किया। इसी संवेदना ने उन्हें जनसेवा और राजनीति की ओर प्रेरित किया।

​1970 के दशक में भारतीय जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारों से प्रभावित होकर वे जनसेवा के मैदान में उतरे। 1983 में कवर्धा नगरपालिका के पार्षद के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले डॉ. रमन सिंह ने अपनी निष्ठा और जनसंपर्क के बल पर धीरे-धीरे एक अलग पहचान बनाई। 1990 और 1993 में वे अविभाजित मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य चुने गए। इसके बाद 1999 में राजनंदगांव से लोकसभा सांसद बनकर वे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री (वाणिज्य एवं उद्योग) बने।

​छत्तीसगढ़ के ‘शिल्पकार’ 15 वर्षों का स्वर्णिम काल

​2003 में जब छत्तीसगढ़ राज्य अभी अपने शैशवकाल में था और प्रशासनिक व बुनियादी ढांचे की चुनौतियों से जूझ रहा था, तब भारतीय जनता पार्टी ने डॉ. रमन सिंह पर भरोसा जताया। उन्होंने प्रदेश की बागडोर संभाली और लगातार 15 वर्षों (2003 से 2018) तक मुख्यमंत्री के रूप में राज्य का सफल नेतृत्व किया।

चावल वाले बाबा’ की छवि और खाद्य सुरक्षा

डॉ. रमन सिंह की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि रही ‘छत्तीसगढ़ खाद्य सुरक्षा अधिनियम’। 1 रुपये और 2 रुपये किलो चावल योजना ने राज्य के लाखों गरीब, आदिवासी और जरूरतमंद परिवारों को भुखमरी और कुपोषण से मुक्ति दिलाई। इस एक योजना ने उन्हें पूरे देश में ‘चावल वाले बाबा’ के रूप में लोकप्रिय बना दिया।

बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी

उनके कार्यकाल में छत्तीसगढ़ का कोना-कोना मुख्य सड़कों से जुड़ा। गांवों तक बिजली, पक्के मकान, स्कूलों और अस्पतालों का जाल बिछाया गया।

नक्सलवाद पर कठोर प्रहार

राज्य में वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) से निपटने के लिए उन्होंने विकास और सुरक्षा का एक संतुलित मॉडल अपनाया। बस्तर के सुदूर क्षेत्रों में सड़कें पहुंचाकर और प्रशासनिक पहुंच बनाकर उन्होंने विकास की मुख्यधारा से आदिवासियों को जोड़ा।

शिक्षा और स्वास्थ्य का केंद्र

बस्तर से लेकर सरगुजा तक प्रयास आवासीय विद्यालय, मेडिकल कॉलेज, आईआईआईटी (IIIT), एम्स (AIIMS) और स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय जैसी संस्थाओं की स्थापना करके छत्तीसगढ़ को शिक्षा का गंतव्य बनाया।

​व्यक्तित्व और कार्यप्रणाली सौम्यता और संकल्पशक्ति का अनूठा संगम

​डॉ. रमन सिंह के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खासियत उनका ‘अजातशत्रु’ होना है। राजनीति की गहमागहमी और कटुता के बीच भी उनकी मुस्कान और सहजता कभी नहीं खोती।

संवेदनशील और सुलभ नेतृत्व

वे ‘लोकतंत्र’ को जनता के द्वार तक ले जाने के पक्षधर रहे। ‘लोक सुराज अभियान’ के तहत भीषण गर्मी में हेलीकॉप्टर से सीधे किसी भी गांव में उतर जाना, चौपाल लगाना और ग्रामीणों की समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट समाधान करना उनकी कार्यशैली का अहम हिस्सा था।

सर्वसमावेशी दृष्टि

उन्होंने समाज के हर वर्ग—किसान, युवा, महिला, मजदूर और जनजाति समुदाय—के कल्याण के लिए योजनाएं बनाईं। महतारी सुरक्षा, निःशुल्क टिफिन योजना, चरण पादुका योजना और सरस्वती साइकिल योजना जैसी पहलों ने आमजन के जीवन को सुगम बनाया।

​ वर्तमान भूमिका और सतत जनसेवा

​15 वर्षों तक मुख्यमंत्री के रूप में सेवाएं देने के बाद भी डॉ. रमन सिंह का जनसेवा का संकल्प अडिग रहा। वर्तमान में छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में वे अपनी विधायी कार्यकुशलता और निष्पक्षता से सदन की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। उनका विशाल अनुभव और दूरदर्शिता आज भी राज्य के विकास मार्ग को आलोकित कर रही है।

​प्रवक्ता.कॉम की शुभकामनाएं

​डॉ. रमन सिंह केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के आधुनिक रूपांतरण के शिल्पकार हैं। जिन्होंने बीमारू राज्य का ठप्पा हटाकर छत्तीसगढ़ को एक समृद्ध, सशक्त और विकासशील राज्य की श्रेणी में ला खड़ा किया। उनका जीवन यह सिखाता है कि दृढ़ संकल्प, विनम्रता और निःस्वार्थ सेवा भाव से किसी भी बड़े से बड़े लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

​छत्तीसगढ़ की माटी के इस लाडले सपूत को प्रवक्ता .कॉम की तरफ से जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं! ईश्वर से प्रार्थना है कि वे सदैव स्वस्थ रहें और दीर्घायु होकर देश व प्रदेश की सेवा करते रहें।

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