नारायणपुर में रंगमंच की नई रोशनी: नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के 30 दिवसीय प्रशिक्षण के बाद सरेंडर नक्सल युवाओं ने चक्रधर समारोह में दी ऐतिहासिक प्रस्तुति
हिंसा का रास्ता छोड़ कला से जुड़े युवा: NSD के प्रशिक्षण के बाद चक्रधर समारोह में दी शानदार प्रस्तुति उप-शीर्षक: नारायणपुर जिला प्रशासन की पहल से 100 पुनर्वासित नक्सल युवाओं को मिला 30 दिवसीय नाट्य प्रशिक्षण; बस्तर के कलाकारों के लिए खुले नए द्वार।
रायपुर/ नारायणपुर प्रवक्ता. कॉम 27 सितंबर
विजय सिंह ठाकुर
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिला प्रशासन ने पुनर्वासित एवं समाज की मुख्यधारा में लौट रहे युवाओं को कला और रंगमंच से सशक्त करने के लिए एक अभिनव पहल की है। जिला प्रशासन ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), नई दिल्ली के सहयोग से नारायणपुर में 30 दिवसीय प्रस्तुतिपरक नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल आयोजन किया।

इस विशेष कार्यशाला के दौरान NSD नई दिल्ली की विशेषज्ञ टीम ने सरेंडर कर चुके नक्सल युवाओं और स्थानीय युवाओं को 30 दिनों तक अभिनय, रंगमंच, मंच संचालन और कला की विभिन्न विधाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। कार्यशाला में 100 पुनर्वासित आदिवासी युवाओं सहित कुल 125 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
प्रशिक्षण से राष्ट्रीय मंच तक का सफर

30 दिनों के कठोर प्रशिक्षण के बाद इन युवाओं ने रायगढ़ में आयोजित प्रतिष्ठित ‘चक्रधर समारोह’ के समापन अवसर पर एक प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति दी। हिंसा से भरे अतीत को पीछे छोड़कर सार्वजनिक मंच पर दी गई इस प्रस्तुति को दर्शकों और विशेषज्ञों की भरपूर सराहना मिली।
आत्मविश्वास और पुनर्वास का नया जरिया
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य पुनर्वासित युवाओं की रचनात्मक प्रतिभा को निखारना, उनमें नया आत्मविश्वास जगाना और बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान करना है।
नारायणपुर जिला प्रशासन और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के इस समन्वित प्रयास ने यह साबित कर दिखाया है कि कला और रंगमंच, भटके हुए युवाओं को अभिव्यक्ति का सही रास्ता देने और उन्हें समाज से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।





