ट्रंप ने 100% टैरिफ वाला कानून रोका: रूस से तेल खरीदने में भारत-चीन को राहत

नई दिल्ली/वाशिंगटन
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़े कूटनीतिक और आर्थिक फैसले के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों को निशाना बनाने वाले नए कानून पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस महत्वपूर्ण कदम से भारत और चीन समेत उन पांच प्रमुख देशों को बड़ी राहत मिली है, जिन पर इस कानून के कारण 100% तक भारी-भरकम टैरिफ (शुल्क) लगने का खतरा मंडरा रहा था।
क्या था नया कानून और इसका उद्देश्य?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमरीकी राष्ट्रपति ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले इस विवादित बिल पर 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर किए थे। इस कानून का मुख्य और प्रत्यक्ष उद्देश्य रूस की आय के स्रोतों को पूरी तरह प्रतिबंधित करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध में उसे आर्थिक मोर्चे पर भारी मुश्किलों का सामना करना पड़े।
इस कानून के दायरे में रूस से सबसे ज्यादा तेल और गैस आयात करने वाले शीर्ष पाँच देश आते— जिनमें चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। इन सभी देशों पर अमरीका द्वारा 100% तक टैरिफ लगाने की तलवार लटक रही थी।
ट्रंप का आधिकारिक बयान
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने इस फैसले के पक्ष में स्पष्टीकरण देते हुए कहा:
“मैं ग्राहम अधिनियम में निर्धारित प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों को लागू करने से छूट देता हूं। इस समय यह छूट देना अमरीका के राष्ट्रीय हित में है।”
कानून के नियमों के तहत, इस पर हस्ताक्षर करने के 30 दिनों के भीतर अमरीकी प्रशासन को प्रतिबंध लगाने या न लगाने का अंतिम फैसला लेना था। हालांकि, प्रशासन द्वारा दी गई यह राहत फिलहाल अस्थायी है, जिसका अर्थ है कि भविष्य में ये शुल्क और प्रतिबंध दोबारा लागू किए जा सकते हैं।
भारत के लिए क्यों बेहद अहम है यह फैसला?
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह निर्णय भारत के लिए कई मायनों में राहत भरा है:
शुल्क विवाद टला
इस फैसले से भारत और अमरीका के बीच रूसी तेल खरीद को लेकर पैदा होने वाले तत्काल शुल्क विवाद का खतरा फिलहाल टल गया है।
व्यापार समझौतों को गति
वर्तमान में भारत और अमरीका के बीच एक महत्वपूर्ण ट्रेड डील (व्यापार समझौते) को लेकर बातचीत जारी है। इस फैसले के बाद डील के रास्ते में आने वाली बड़ी अड़चनें दूर होने की उम्मीद है।
ऊर्जा सुरक्षा और कम लागत
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रियायती दरों पर रूसी तेल के आयात पर काफी हद तक निर्भर है। इस छूट से भारतीय रिफाइनरियों की परिचालन लागत को नियंत्रित रखने और देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में खासी मदद मिलेगी।
घरेलू राजनीति और G20 पर नजर
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप ने यह रणनीतिक फैसला ऐसे समय में लिया है जब अमरीका में पेट्रोल-डीजल और ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। आगामी नवंबर माह में अमरीका में ‘मिडटर्म चुनाव’ होने वाले हैं, जहाँ आसमान छूती महंगाई और पेट्रोल की कीमतें सबसे बड़े और संवेदनशील चुनावी मुद्दे बने हुए हैं।
इसके अलावा, इस दौरान वैश्विक कूटनीति से जुड़ी एक अन्य बड़ी खबर भी सामने आई है। ट्रंप ने जानकारी दी है कि रूस ने वर्ष 2026 में अमरीका की मेजबानी में आयोजित होने वाली G20 बैठकों में शामिल होने की औपचारिक इच्छा जताई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अमरीकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि यदि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर प्यूतिन इस बैठक में शामिल होने आते हैं, तो अमरीका में उनका स्वागत किया जाएगा।




