15 अगस्त 1947: आजादी और छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य इसी दिन रायपुर के “जय स्तंभ ” चौक की नींव रखी गई थी पहला झंडा रायपुर पुलिस ग्राउंड में आर.के. पाटिल और गांधी चौक में वामनबली राव लाखे ने फहराया था
भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से उस समय छत्तीसगढ़ 'मध्य प्रांत और बरार' के अधीन था, जिसकी राजधानी नागपुर थी। नागपुर के ऐतिहासिक सीताबर्डी किले पर छत्तीसगढ़ की माटी के सपूत और मध्य प्रांत के पहले मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल ने तिरंगा फहराया था, राजधानी रायपुर के गांधी चौक पर गांधीवादी व वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी वामन बलीराम लाखे ने दोपहर करीब 3 बजे तिरंगा फहराया।
रायपुर प्रवक्ता.कॉम 15 अगस्त 2026
15 अगस्त 1947 का दिन भारतीय इतिहास का सबसे स्वर्णिम और गौरवशाली दिन है, जब सदियों की गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर भारत ने स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में सांस ली थी। ब्रिटिश राज के अंत और नए युग के सूत्रपात के इस उल्लास से छत्तीसगढ़ का अंचल भी अछूता नहीं था। हालांकि उस समय छत्तीसगढ़ एक स्वतंत्र राज्य के रूप में अस्तित्व में नहीं था, बल्कि यह ‘मध्य प्रांत और बरार’ (Central Provinces and Berar) का एक प्रमुख हिस्सा था।

आजादी के समय छत्तीसगढ़ में क्या-क्या हुआ था?
उत्सव और उल्लास का माहौल:
आजादी की आधिकारिक घोषणा से पहले ही जुलाई 1947 से ही छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों (रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग आदि) में जश्न की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं। सरकारी आदेशों का इंतजार किए बिना जगह-जगह प्रभात फेरियां निकाली गईं और ‘जय हिंद’ के नारे गूंज उठे।
कैदियों की रिहाई:
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए और सद्भावना स्वरूप, रायपुर के तत्कालीन कमिश्नर के.बी.एल. सेठ के आदेशानुसार छत्तीसगढ़ की जेलों से लगभग 200 से अधिक बंदियों (विशेषकर राजनीतिक और सामान्य कैदियों) को रिहा किया गया।
प्रमुख चौराहों और संस्थानों पर ध्वजारोहण:
क्षेत्र के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों और दिग्गजों ने विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों पर तिरंगा फहराया। रायपुर के पुलिस ग्राउंड में आर.के. पाटिल ने झंडा फहराया, वहीं ऐतिहासिक गांधी चौक पर भी भव्य आयोजन हुए। इसी ऐतिहासिक बेला में रायपुर में ‘जयस्तंभ चौक’ की नींव रखी गई, जो आज भी शहर का प्रमुख और ऐतिहासिक केंद्र है।
छत्तीसगढ़ में पहला झंडा किसने फहराया?
भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से उस समय छत्तीसगढ़ ‘मध्य प्रांत और बरार’ के अधीन था, जिसकी राजधानी नागपुर थी। नागपुर के ऐतिहासिक सीताबर्डी किले पर छत्तीसगढ़ की माटी के सपूत और मध्य प्रांत के पहले मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल ने तिरंगा फहराया था।
यदि बात छत्तीसगढ़ संभाग और इसके प्रमुख जिलों की करें, तो विभिन्न क्षेत्रों में वहां के दिग्गज नेताओं ने ध्वजारोहण किया था:
रायपुर:
राजधानी रायपुर के गांधी चौक पर गांधीवादी व वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी वामन बलीराम लाखे ने दोपहर करीब 3 बजे तिरंगा फहराया। इसके अलावा पुलिस लाइन में आर.के. पाटिल ने झंडा फहराया।
दुर्ग:
दुर्ग जिले में ध्वजारोहण का ऐतिहासिक कार्य उस समय की प्रांतीय विधानसभा के अध्यक्ष और संविधान सभा की हिंदी प्रारूप समिति के अध्यक्ष घनश्याम सिंह गुप्त ने किया था। उन्होंने लोगों को एकता और शांति के साथ रहने का संदेश दिया।
बिलासपुर:
बिलासपुर और आसपास के संभाग क्षेत्रों में मुंगेली के प्रसिद्ध नेता रामगोपाल तिवारी व अन्य स्थानीय नेताओं ने स्वतंत्रता का जश्न मनाते हुए झंडावंदन किया।
सामाजिक सद्भाव और जनमानस
देश के विभाजन का दर्द इस दौरान पूरे देश के साथ छत्तीसगढ़ ने भी महसूस किया। हालांकि, छत्तीसगढ़ के लोगों ने अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक आत्मीयता को बनाए रखा। उस दौर में छत्तीसगढ़ी लोकजीवन में आजादी के उल्लास को दर्शाती कई लोक-पंक्तियां और कहावतें प्रचलित हुईं, जो यहाँ के जनमानस में देशप्रेम और भाईचारे की मिसाल पेश करती हैं। ठाकुर प्यारेलाल सिंह जैसे महान नेताओं के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने आजादी के इस सफर में अपनी एक अमिट और गौरवशाली छाप छोड़ी।






