शिक्षक को अकर्मण्य समझना बंद करें अधिकारी : मध्य प्रदेश शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन, ई-अटेंडेंस और वेतन कटौती के आदेश पर रोक की मांग
भोपाल प्रवक्ता.कॉम 20 जुलाई 2026
मध्य प्रदेश शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन सौंपकर ई-अटेंडेंस के नाम पर शिक्षकों के वेतन काटने के आदेश को तुरंत निरस्त करने की मांग की है।
अकर्मण्य मानने पर आपत्ति:
संघ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों का शिक्षकों (गुरुजनों) पर इस तरह बार-बार अविश्वास जताना और उन्हें “अकर्मण्य” समझकर उनकी कर्तव्यनिष्ठा पर प्रश्न चिह्न खड़ा करना राष्ट्र शिल्पियों का अपमान है।
दबाव की राजनीति का विरोध: लगभग 56-58 वर्ष पुराने इस संगठन ने कहा है कि शिक्षकों को डराकर, भय बताकर और दबाव में लेना प्रशासनिक अराजकता है।
प्रमुख माँगे और तर्क:

वेतन कटौती और प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक: लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 01 जुलाई 2026 को जारी उस आदेश को तत्काल स्थगित किया जाए जिसमें ई-अटेंडेंस न होने पर वेतन काटने और निलंबन/अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही गई है।

बुनियादी सुविधाओं का अभाव: जब तक सरकार शिक्षकों को एडवांस मोबाइल, डेटा पैक का खर्च और विद्यालयों में उचित नेटवर्क/कनेक्टिविटी व बिजली की व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराती, तब तक ई-अटेंडेंस अनिवार्य न की जाए।

तकनीकी समस्याओं का समाधान:
मोबाइल खराब होने, नेटवर्क गायब होने या ऐप (3.0 ऐप) में तकनीकी त्रुटियों के कारण उपस्थिति न लग पाने पर आपात स्थिति में ऑफ़लाइन उपस्थिति का विकल्प भी मान्य किया जाना चाहिए।
वेतन पोर्टल से अलगाव:
ई-अटेंडेंस ऐप को वेतन के पोर्टल (IFMIS) से न जोड़ा जाए, क्योंकि मासिक वेतन का सीधा संबंध शिक्षक के परिवार और परिजनों के भरण-पोषण से है।
संघ के पदाधिकारी:
इस ज्ञापन पर प्रांताध्यक्ष डॉ. क्षेत्रवीर सिंह राठौर और प्रदेश महामंत्री राकेश गुप्ता के हस्ताक्षर हैं, जिन्होंने मांग की है कि अपमानजनक आदेशों को तुरंत वापस लिया जाए ताकि प्रदेश के 3 लाख से अधिक शिक्षक भयमुक्त होकर अपना कर्तव्य निभा सकें।
आनुषंगिक संगठन है छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ
मध्य प्रदेश शिक्षक संघ प्राथमिक से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के शासकीय एवं अशासकीय शिक्षकों का एक प्रमुख संगठन है, जो अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) से संबद्ध है और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की विचारधारा से जुड़ा हुआ है। पत्र के शीर्ष पर भी “स्था. 1970” (स्थापना वर्ष 1970) अंकित है, जिसके अनुसार यह लगभग 56 वर्ष पुराना संगठन है। इसके बाद भी सरकार बात को गंभीरता के साथ सुनकर निर्णय लेने में गंभीरता नहीं दिखा रही है।






