एबीईओ को प्रभारी बीईओ बनाये जाने के विरुद्ध प्राचार्य की याचिका डबल बेंच ने किया खारिज

रायपुर/ बिलासपुर/प्रवक्ता.कॉम 19 नवंबर 2025
संतोष कुमार भास्कर मूल पद प्राचार्य कबीरधाम जिले के सहसपुर ब्लॉक 2019 से बीईओ के रूप में कार्यरत थे उन्होंने शासकीय उच्च विद्यालय पेंडरवानी, ब्लॉक छुईखदान, जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में प्राचार्य के पद पर स्थानांतरित किए जाने वाले आदेश को रद्द करने तथा सहायक खंड शिक्षा अधिकारी देवेंद्र कुमार साहू को ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, सहसपुर लोहारा का प्रभार दिए जाने वाले आदेश को निरस्त हेतु याचिका दायर किया था जिसे सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया था, फिर उन्होंने डबल बेंच में याचिका किया डबल बेंच ने भी याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सन्तोष कुमार भास्कर का मूल पद ‘प्राचार्य’ है तथा उसे वर्ष 2019 से अस्थायी रूप से ब्लॉक शिक्षा अधिकारी का प्रभार सौंपा गया था। स्थानांतरण आदेश केवल को उसके मूल पद पर वापस भेजता है तथा ब्लॉक शिक्षा अधिकारी का प्रभार एबीईओ को दिया गया है जिसके पास भी 10 वर्षों का पर्याप्त अनुभव है।
कोर्ट के आदेश इस प्रकार है






माननीय न्यायालय कृपया याचिकाकर्ता को दिनांक 03.10.2025 (अनु.पी/3) के ‘रिलीविंग ऑर्डर’ को निरस्त करने की कृपा करे।
माननीय न्यायालय कृपया प्रतिवादी को निर्देश दे कि वह अंतरिम अवधि के वेतन का भुगतान ब्याज सहित करे।”
मामले के तथ्य इस प्रकार हैं कि याचिकाकर्ता को दिनांक 29.09.2025 के आदेश द्वारा सहायक खंड शिक्षा अधिकारी, सहसपुर लोहारा, जिला कबीरधाम के पद से हटाकर प्राचार्य, शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पेंडरवानी, ब्लॉक छुईखदान, जिला खैरागढ़ के पद पर उसके मूल पद पर वापस भेज दिया गया। याचिकाकर्ता ने इस स्थानांतरण आदेश के विरुद्ध रिट याचिका दायर की, जिसे learned एकल न्यायाधीश ने खारिज कर दिया, इसलिए यह अपील दायर की गई है।
एकल न्यायाधीश ने दिनांक 17.10.2025 को पारित आदेश में निम्न निष्कर्ष दिए:
अभिलेख से स्पष्ट होता है कि याचिकाकर्ता पिछले 6 वर्षों से प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी के रूप में पदस्थ है। यह विधि का स्थापित सिद्धांत है कि कोई भी कर्मचारी किसी एक स्थान पर अनिश्चितकाल तक पदस्थ रहने का अधिकार नहीं रखता। चूँकि याचिकाकर्ता का मूल पद प्राचार्य है, इसलिए उसकी किसी सेवा शर्त का उल्लंघन नहीं हुआ है।
मामले के तथ्यों पर विचार करने पर मुझे प्रतिवादियों द्वारा कोई अवैधता या अनियमितता नहीं मिलती, जिससे इस स्थानांतरण आदेश में न्यायिक हस्तक्षेप किया जा सके।
अतः रिट याचिका निराधार पाई गई और उसे निरस्त किया जाता है।”
अपीलकर्ता के अधिवक्ता ने प्रस्तुत किया कि अपीलकर्ता को 27.06.2015 को प्राचार्य के पद पर पदोन्नत किया गया था तथा वर्ष 2019 से उसे ब्लॉक शिक्षा अधिकारी का प्रभार सौंपा गया था। उत्तरदाता क्रमांक 3 — देवेंद्र साहू (सहायक खंड शिक्षा अधिकारी) को उसके स्थान पर लोहारा में पदस्थ करने का आदेश अवैध, मनमाना और दुर्भावनापूर्ण है, क्योंकि इससे वरिष्ठ अपीलकर्ता को दरकिनार करके कनिष्ठ अधिकारी को प्रभार दिया गया है। यह भी प्रस्तुत किया गया कि सामान्य प्रशासन विभाग के प्रचलित परिपत्र एवं दिनांक 05.06.2025 की स्थानांतरण नीति (क्लॉज 2.2) के अनुसार रिक्त पद समान रैंक के अधिकारियों से भरे जाने चाहिए तथा वरिष्ठतम अधिकारी को प्रभार दिया जाना चाहिए।
छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संवर्ग) भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2019 का क्लॉज 17 यह भी कहता है कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के 75% पद प्राचार्यों से भरे जाने चाहिए, जिनके पास न्यूनतम 5 वर्ष का अनुभव हो। अपीलकर्ता इस पात्रता को पूरा करता है।
अतः स्थानांतरण नियम, नीति एवं कानून के विरुद्ध है तथा अपीलकर्ता के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी पद पर दावे को मान्यता दी जानी चाहिए।
दूसरी ओर, राज्य के अधिवक्ता ने प्रस्तुत किया कि उत्तरदाता क्रमांक 3 के पास सहायक खंड शिक्षा अधिकारी के पद पर 10 वर्षों का अनुभव है, इसलिए वह भी ब्लॉक शिक्षा अधिकारी पद के लिए समान रूप से पात्र है। अतः उसे प्रभार दिए जाने में कोई अवैधता या अनियमितता नहीं है इसलिए एकल न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश में इस न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है, और रिट अपील को निरस्त किया जाना चाहिए।
पक्षकारों की दलीलें सुनी गईं एवं अभिलेख का परीक्षण किया गया। अभिलेख से स्पष्ट है कि *अपीलकर्ता का मूल पद ‘प्राचार्य’ है तथा उसे वर्ष 2019 से अस्थायी रूप से ब्लॉक शिक्षा अधिकारी का प्रभार सौंपा गया था। दिनांक 29.09.2025 का स्थानांतरण आदेश केवल अपीलकर्ता को उसके मूल पद पर वापस भेजता है तथा ब्लॉक शिक्षा अधिकारी का प्रभार उत्तरदाता क्रमांक 3 को देता है, *जिसके पास भी 10 वर्षों का पर्याप्त अनुभव है।*
यह स्थापित विधि सिद्धांत है कि कोई कर्मचारी किसी स्थान पर अनिश्चितकाल तक बने रहने का दावा नहीं कर सकता, तथा अस्थायी प्रभार निरंतरता का अधिकार नहीं देता।अपीलकर्ता द्वारा धारण किया गया अस्थायी प्रभार उसे उस पद पर बने रहने का कोई स्थायी अधिकार प्रदान नहीं करता। प्रतिवादियों ने लागू नियमों, नीतियों एवं परिपत्रों — विशेष रूप से सामान्य प्रशासन विभाग की 05.06.2025 की स्थानांतरण नीति तथा भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2019 — के अनुरूप कार्य किया है, जो अनुभव एवं प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर प्रभार देने का विवेक प्रदान करते हैं।
स्थानांतरण दुर्भावनापूर्ण या मनमाना होने का कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। इसलिए किसी अवैधता या अनियमितता का उल्लेख नहीं मिलता, जिससे न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो।
इसके अलावा, आंतरिक अपील (Intra-Court Appeal) में हस्तक्षेप का दायरा सीमित है और केवल उन्हीं मामलों में होता है जहाँ आदेश में स्पष्ट अवैधता, मनमानी या अधिकार क्षेत्र की त्रुटि हो। वर्तमान मामले में learned एकल न्यायाधीश ने रिट याचिका को सही रूप से निरस्त किया है।
अतः रिट अपील निरर्थक पाई जाती है एवं इसे प्रारंभिक स्तर पर ही निरस्त किया जाता है।





