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टेट अनिवार्यता के चलते राजस्थान में 80 हजार शिक्षकों का प्रमोशन अटकेगा, 4 अप्रैल को दिल्ली कूच अध्यादेश लाकर राहत की मांग

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बिना टेट वाले शिक्षकों के सामने नई चुनौती, सरकार से अध्यादेश लाकर राहत देने की मांग करें

जयपुर प्रवक्ता.कॉम 24 मार्च 2026

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राजस्थान में 80 हजार शिक्षक की टेंशन बढ़ती जा रही है। यह वे शिक्षक है, जिनके पास शिक्षक पात्रता (टेट) नहीं है। इन शिक्षकों का प्रमोशन अटकने की स्थिति बन गई है। इन शिक्षकों की जब नौकरी लगी थी तब शिक्षक बनने के लिए टेट की अनिवार्यता नहीं थी, लेकिन पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सभी शिक्षकों को दो साल के भीतर टेट की पात्रता लेनी होगी। जिन शिक्षकों की नौकरी को 5 साल बचे उन्हें राहत भले है पर पदोन्नति नहीं मिलेगी।

सरकार अध्यादेश लाकर शिक्षकों को दे राहत

राजस्थान प्राथमिक माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा का कहना है कि टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले 4 अप्रैल को इस काले कानून का विरोध किया जाएगा। इसमें संशोधन की मांग की जाएगी, ताकि प्रदेश के 80 हजार शिक्षकों सहित देश के लाखों शिक्षकों के प्रमोशन का

हैं। उन्हें प्रमोशन लेने के लिए टेट की पात्रता लेनी होगी। टेट के अभाव में उनका प्रमोशन नहीं होगा।

राजस्थान में पहली बार आरटेट का आयोजन 2011 में हुआ था। इसके बाद नौकरी लगे शिक्षकों के पास तो टेट की पात्रता है, लेकिन इससे पहले नौकरी लगे 80 हजार

शिक्षकों के पास टेट की पात्रता नहीं है। यह शिक्षक चिंतित है कि उनका प्रमोशन कैसे होगा। सरकार भी उनके मामले को लेकर अभी कुछ नहीं बोल रही है। टेट की पात्रता लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जो 2 साल का समय दिया था। उसमें से 6 महीने बीत चुके हैं डेढ़ साल का समय शेष है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस तरह का काला कानून लागू करना शिक्षकों के प्रति न्याय संगत नहीं है। सरकार को प्रसंज्ञान लेना चाहिए तथा अध्यादेश लाकर इस कानून में संशोधन करना चाहिए ताकि 2011 से पूर्व लगे शिक्षकों को इसके दायरे से बाहर किया जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके।अपने प्रमोशन के लिए चिंतित ऐसे शिक्षकों ने अब मोर्चा खोल दिया है। वे 4 अप्रैल को प्रदेश के अलग-अलग जिलों से दिल्ली कूच करेंगे और रामलीला मैदान पर शक्ति प्रदर्शन करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में संशोधन की मांग उठाएंगे।

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