किस्त काटने से 24 घंटे पहले ग्राहक को सूचित करना होगा ऑटो भुगतान से जुड़े नए नियम लागू मनमाने तरीके से खाते से रकम नहीं काट सकेंगे बैंक

नई दिल्ली, एजेंसी
प्रवक्ता.कॉम 25 अप्रैल 2026

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ई-मैडेट से जुड़े नए दिशा-निर्देश मंगलवार से लागू कर दिए। नए नियमों के तहत अब किसी भी तरह का ऑनलाइन ऑटो भुगतान शुरू करने से पहले ग्राहक को एक बार पंजीकरण करना होगा और इसके लिए अतिरिक्त सत्यापन करना होगा। साथ ही ग्राहक के खाते से रकम काटने से पहले संबंधित बैंक या संबंधित वित्तीय संस्थानों को 24 घंटे पहले इसकी सूचना देनी होनी।
नए नियम उन सभी ऑटो भुगतान जैसे ओटीटी सब्सक्रिप्शन, बीमा प्रीमियम, बिल भुगतान, ईएमआई आदि पर लागू होगा, जो कार्ड, यूपीआई या प्रीपेड माध्यमों से किए जाते हैं। आरबीआई ने यह भी साफ किया है कि ग्राहक को यह सुविधा दी जाएगी कि वह कभी भी अपने ई-मैंडेट को बदल सके या पूरी तरह बंद कर सके। इससे अब ग्राहकों को अपने खाते से कटने वाले पैसों पर अधिक नियंत्रण मिलेगा। इसका असर सीधे उन करोड़ों लोगों पड़ेगा, जिनके बैंक खाते से हर महीने कोई न कोई रकम अपने आप कटती है।
भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ देना होगा पूरा ब्यौरा

पूरा ब्योरा देना होगा: सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब हर ऑटो पेमेंट से पहले ग्राहक को कम से कम 24 घंटे पहले सूचना भेजना अनिवार्य होगा। इस सूचना में संबंधित कंपनी का नाम, भुगतान की राशि, तारीख और अन्य जरूरी विवरण शामिल होंगे। इससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की स्थिति में ग्राहक तुरंत कार्रवाई कर सकेगा। अगर ग्राहक चाहे तो इस अवधि के दौरान भुगतान को रोक भी सकता है। फास्टैग और नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड के ऑटो रिचार्ज में यह पूर्व सूचना जरूरी नहीं है।
15 हजार रुपये तक के भुगतान पर ओटीपी नहीं
राशि से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। नए प्रावधान के तहत ब ₹15,000 तक के नियमित ऑटो डेबिट भुगतान बिना हर बार ओटीपी डाले पूरे हो सकेंगे। लेकिन इससे ज्यादा राशि पर हर बार ओटीपी की जरूरत होगी। हालांकि, बीमा प्रीमियम, म्यूचुअल फंड निवेश और क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान के लिए यह सीमा बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति लेनदेन कर दी गई है।
एक अरब से अधिक के लेनदेन हुए
आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में यूपीआई के जरिए होने वाले ऑटोपे भुगतान दोगुने हो गए हैं। नवंबर 2025 में शीर्ष 10 बैंकों ने करीब 92 करोड़ से ज्यादा ऑटोपे लेनदेन प्रोसेस किए। फिलहाल ऑटोपे हर महीने लगभग एक अरब लेनदेन संभाल रहा है और यह कुल यूपीआई लेनदेन का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है।
ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं
आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि ई-मैडेट सुविधा के उपयोग पर ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। साथ ही, किसी भी विवाद या गलत लेनदेन की स्थिति में शिकायत दर्ज करने और समाधान के लिए उचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी।
मामले से जुड़े जरूरी सवाल-जवाब
ई-मॅडेट क्या होता है?
जब ग्राहक एक बार अनुमति देता हैं और उसके बाद हर महीने उसके खाते से अपने आप पैसा कटता रहता है, उसे ई-मैंडेट कहते हैं। जैसे-बिजली बिल, मोबाइल बिल, ओटीटी, बीमा प्रीमियम या क्रेडिट कार्ड बिल।
आरबीआई के नए नियम कबसे और किन लोगों पर लागू हैं
आरबीआई ने 21 अप्रैल को ई-मैडेट फ्रेमवर्क-2026 लागू कर दिए हैं। नए नियम उन पर लागूहोंगे, जो ऑटो डेबिट, यूपीआई ऑटो-पे या नियमित बिल भुगतान करते हैं।सबसे बड़ा फायदा क्या है? बैंक या संबंधित वित्तीय संस्थान मनमाने तरीके से ग्राहक के खाते से रकम नहीं काट सकेंगे। साथ ही ग्राहक जब चाहे इस सुविधा को बंद कर सकते हैं।
अगर भुगतान रोकना हो तो क्या करना होगा ?
आप किसी भी भुगतान को पहले ही रोक सकते हैं या पूरा ई-मैंडेटयूपीआई ऐप में ऐसे देख सकते हैं ऑटो-पे मैंडेअपना यूपीआई ऐप खोलें। ऊपर दिए गए प्रोफाइल या सेटिंग्स पर जाएं
वहां ऑटो-पे, मैडेट का विकल्प चुनें। अब आपको सभी सक्रिय और समाप्त अनुमतियां दिखाई देंगी
यहां आप देख सकते हैं कि किस कंपनी या सेवा को पैसा जा रहा है, कितनी राशि कट रही है, कितने समय तक कटेगी और अगली कटौती कब होगी।
ग्राहक ऑटो-पे भुगतान को ऐसे बंद करें
मैडेट/अनुमति सूची में जाएं। जिसभुगतान को बंद करना है, उसे चुनेंरद्द करें” या “निरस्त करें” का विकल्प दबाएं। अपना यूपीआई पिनडालकर पुष्टि करेंइसके बाद आपको पुष्टि संदेश मिल जाएगा कि अनुमति बंद हो गई है।बंद कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित ऐप पर इस सुविधा को निष्क्रिय करना होगा।
क्या बैंक इसके लिए चार्ज लेगा ?
नहीं, इस सुविधा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
अगर कार्ड बदल जाए तो क्या होगा ?
नया कार्ड आने पर पुराना ई-मैंडेट उसी से जोड़ दिया जाएगा, दोबारा सेट करने की जरूरत नहीं होगी।





