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नक्सलवाद के खात्मे के बाद बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक से जाएगा बड़ा संदेश

बस्तर से देश को सहकारिता का संदेश: गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक , सीएम साय ने कहा –बस्तर में शांति बहाली के बाद इस स्तर के आयोजन का होना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। इंद्रावती की गोद से अब बस्तर विकास की नई गाथा लिखेगा।"


​रायपुर/जगदलपुर / प्रवक्ता.कॉम 18, मई 2026

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छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र, जो कभी अपनी भौगोलिक जटिलताओं और सुरक्षा चुनौतियों के लिए जाना जाता था, आज देश की नीति-निर्धारण का केंद्र बनने जा रहा है। 19 मई 2026 को बस्तर (जगदलपुर) में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक आयोजित होने जा रही है। इस हाई-प्रोफाइल और बेहद महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे।
​31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ को सशस्त्र माओवाद (नक्सलवाद) से पूरी तरह मुक्त घोषित किए जाने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री का यह पहला छत्तीसगढ़ दौरा है। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में बस्तर में इतनी बड़ी राष्ट्रीय स्तर की बैठक का आयोजन होना इस बात का प्रतीक है कि यह क्षेत्र अब शांति, सुरक्षा और तीव्र विकास के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है।
​चार राज्यों के मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता जुटेंगे
​इस महाबैठक में मध्य क्षेत्रीय परिषद के अंतर्गत आने वाले चार राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता शामिल होंगे:
​विष्णु देव साय (मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ – मेजबान)
​डॉ. मोहन यादव (मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश)
​योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)
​पुशकर सिंह धामी (मुख्यमंत्री, उत्तराखंड)
​इन मुख्यमंत्रियों के साथ हर राज्य के दो वरिष्ठ मंत्री, मुख्य सचिव (Chief Secretaries) और केंद्र सरकार के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी भी इस मंथन का हिस्सा बनेंगे।
​बैठक का मुख्य एजेंडा और चर्चा के बिंदु
​यह परिषद राज्यों के बीच आपसी सहयोग और केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने का एक बेहद प्रभावी मंच है। इस 26वीं बैठक में एक दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा होगी, जिनमें प्रमुख हैं:
​महिला एवं बाल सुरक्षा: महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की त्वरित जांच और ‘फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट’ (FTSC) के माध्यम से मामलों का जल्द निपटारा।
​ग्रामीण बैंकिंग कनेक्टिविटी:

दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में ‘ब्रिक-एंड-मोर्टार’ (स्थायी भवन वाले) बैंक और बैंकिंग सुविधाएं बढ़ाना।
​आपातकालीन प्रतिक्रिया: ‘डायल 112′ जैसी इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट प्रणालियों को और अधिक मजबूत और व्यापक बनाना।
​सार्वजनिक कल्याण योजनाएं: केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी मैकेनिज्म (वितरण प्रणाली) में सुधार करना।
​अंतर-राज्यीय मुद्दे: बिजली, परिवहन, नदी जल और सीमा विवादों (यदि कोई हों) का आपसी सहमति से निपटारा।
​”सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट मॉडल”
​तैयारियों की समीक्षा करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मध्य क्षेत्रीय परिषद एक अनूठी परिषद है जहां सदस्य राज्यों के बीच कोई पुराना विवाद नहीं है। उन्होंने कहा, “मजबूत राज्यों से ही एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण होता है। बस्तर में शांति बहाली के बाद इस स्तर के आयोजन का होना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। इंद्रावती की गोद से अब बस्तर विकास की नई गाथा लिखेगा।”
​’शांति कैंपों’ का ‘जन सुविधा केंद्रों’ में बदलाव
​इस दौरे के दौरान गृह मंत्री अमित शाह केवल बैठक तक सीमित नहीं रहेंगे। वे बस्तर के नेतानार गांव का दौरा भी करेंगे, जहां वे एक ‘जन सुविधा केंद्र’ का उद्घाटन करेंगे। यह केंद्र इस बात की मिसाल है कि कैसे सुरक्षा कैंपों को अब स्वास्थ्य, शिक्षा, आंगनबाड़ी और डिजिटल गवर्नेंस की सुविधाएं देने वाले केंद्रों में बदला जा रहा है।
​इसके अलावा, गृह मंत्री नक्सल हिंसा के पीड़ितों, आत्मसमर्पित माओवादियों, शहीद सुरक्षाकर्मियों के परिजनों और स्थानीय आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधियों से भी सीधा संवाद करेंगे, तथा लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘बस्तर के संग’ में शामिल होकर बस्तर की समृद्ध जनजातीय कला और संस्कृति को सराहेंगे।
​पिछली बैठक
​वाराणसी (2025) में हुई पिछली बैठक के बाद, इस साल बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक का होना देश के ‘को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म’ (सहकारी संघवाद) को एक नई दिशा देगा। राज्यों के आपसी समन्वय से न केवल मध्य भारत का विकास तेज होगा, बल्कि बस्तर जैसे क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी का विस्तार नई ऊंचाइयों को छुएगा।

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