95 साल बाद जनगणना में जाति की होगी गणना, गृह मंत्रालय ने जारी किए 40 सवाल शादी के समय उम्र से लेकर कोविड का टीका कहां लगवाया पूछेंगे प्रगणक ?
देश में आखिरी बार अंग्रेजों के शासनकाल में वर्ष 1931 में जातीय जनगणना हुई थी। आज़ादी के बाद अब पहली बार आधिकारिक तौर पर जाति की गणना की जाएगी।
रायपुर प्रवक्ता.कॉम 17 अगस्त 2026
स्वतंत्र भारत के इतिहास में और देश के कुल 95 वर्षों के अंतराल के बाद, आगामी जनगणना में नागरिकों से उनकी जाति से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। गृह मंत्रालय द्वारा जनगणना-2027 के दूसरे चरण के लिए 40 प्रश्नों की सूची जारी कर दी गई है, जिसमें कई नए और महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है।
राज पत्र की मुख्य मुख्य बातें
95 साल बाद वापसी:
देश में आखिरी बार अंग्रेजों के शासनकाल में वर्ष 1931 में जातीय जनगणना हुई थी। आज़ादी के बाद अब पहली बार आधिकारिक तौर पर जाति की गणना की जाएगी।
40 नए सवाल:
जनगणना के दूसरे चरण में घर-घर जाकर कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे, जो नागरिकों की सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत स्थिति से जुड़े होंगे।
पहचान और वित्तीय विवरण:
इस बार जनगणना में पहली बार बैंक खातों की संख्या, आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, वोटर आईडी, पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी जानकारियां भी दर्ज की जाएंगी।
जनगणना में शामिल होंगे यह प्रमुख सवाल
जारी की गई सूची के अनुसार, नागरिकों से निम्नलिखित विषयों पर मुख्य रूप से जानकारी ली जाएगी:
- शादी के समय उम्र और घोषित राष्ट्रीयता
- धर्म, दिव्यांगता, और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/जाति
- माता-पिता की जानकारी, मातृभाषा और अन्य ज्ञात भाषाएं
- साक्षरता, डिजिटल साक्षरता की स्थिति, और उच्चतम शैक्षणिक स्तर/फैैकल्टी
- पिछले एक साल में काम किया या नहीं, तथा व्यवसाय, उद्योग, व्यापार या सेवा की प्रकृति
- काम की तलाश, काम के लिए उपलब्धता, जन्म स्थान, पिछला निवास स्थान, और पलायन का कारण
- कोविड वैक्सीन का टीका कहां लगवाया
खुला रहेगा ‘जाति का कॉलम’
जनगणना के फॉर्म में सवाल नंबर 10 के तहत जाति का कॉलम ड्रॉप डाउन मेनू (Drop-down menu) की बजाय खुला रखा गया है।
इसका अर्थ है कि गणनाकमी (Enumerator) किसी तय सूची में से विकल्प चुनने के बजाय उत्तरदाता द्वारा बताई गई जाति को सीधे दर्ज करेगा।
विशेषज्ञों की चिंता: जानकारों का मानना है कि कॉलम खुला रहने से उपजाति, गोत्र या क्षेत्रीय विविधताओं के कारण एक ही जाति के अलग-अलग नाम दर्ज हो सकते हैं, जिससे भविष्य में स्पष्ट आंकड़े जुटाने में कुछ मुश्किलें आ सकती हैं।
प्रतिक्रिया
इस नए फॉर्मेट पर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने इन सवालों के स्वरूप पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि बिहार और तेलंगाना में हुए सर्वेक्षणों की तरह पहले से एक निर्धारित सूची (ड्रॉप डाउन लिस्ट) तैयार की जानी चाहिए थी, ताकि केवल विकल्पों पर निशान लगाना पड़े। इस प्रकार खुला कॉलम छोड़ने से सरकार की मंशा पर संदेह जताया जा रहा है।






