भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी: भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष और ‘छत्तीसगढ़’ के स्वप्नद्रष्टा

(श्रद्धेय स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्य तिथि पर विशेष )
विजय सिंह ठाकुर
रायपुर/ प्रवक्ता.कॉम:16 अगस्त 2026
भारतीय राजनीति के अजातशत्रु, उत्कृष्ट वक्ता, ओजस्वी कवि और देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर पूरा देश उन्हें नमन कर रहा है। अटल जी ने अपने राजनीतिक जीवन में जिन उसूलों, राष्ट्रवाद और सुशासन की मिसाल पेश की, वे आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा हैं। जब भी अटल जी के कृतित्व और व्यक्तित्व का स्मरण होता है, तो छत्तीसगढ़ के साथ उनका विशेष आत्मीय रिश्ता स्वतः ज़ेहन में आ जाता है। वे न केवल देश के प्रधानमंत्री थे, बल्कि छत्तीसगढ़ के करोड़ों नागरिकों के लिए ‘राज्य निर्माता’ भी हैं।
छत्तीसगढ़ से जुड़ाव: “आप मुझे 11 सांसद दो, मैं छत्तीसगढ़ दूंगा”

छत्तीसगढ़ के निर्माण के इतिहास में अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका सबसे अहम और निर्णयात्मक रही है। मध्य प्रदेश का हिस्सा रहे इस आंचल के संसाधनों की प्रचुरता और विकास की उपेक्षा को अटल जी ने बहुत करीब से महसूस किया था। उनका यह मानना था कि जब तक क्षेत्र का प्रशासनिक नियंत्रण स्थानीय स्तर पर मजबूत नहीं होगा, तब तक आदिवासियों और पिछड़ों का समग्र विकास संभव नहीं है।
रायपुर का ऐतिहासिक सप्रेशाला
मैदान और वह वादा: 1998-99 के लोकसभा चुनाव के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी चुनावी सभा को संबोधित करने रायपुर आए थे। उस समय उन्होंने रायपुर की धरती से छत्तीसगढ़ की जनता को एक ऐतिहासिक आश्वासन दिया था— “आप मुझे 11 सांसद दो, मैं छत्तीसगढ़ दूंगा।” छत्तीसगढ़ की जनता ने भी उन पर भरोसा जताया और केंद्र में अटल जी के नेतृत्व में सरकार का गठन हुआ।
अपने वादे को किया पूरा:
प्रधानमंत्री बनते ही अटल जी ने अपने वचन को निभाया। उनके कार्यकाल में ही प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ देश के 26वें नए राज्य के रूप में मानचित्र पर उभरा। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ में आज भी उन्हें भगवान या एक अभिभावक की तरह सम्मान दिया जाता है और राज्य में “हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे” का राजनीतिक व जनभावना का भाव उनकी ही देन है।
शिक्षा और विकास के क्षेत्र में अमिट छाप
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने इसके चहुंमुखी विकास के लिए कई बड़े कदम उठाए:
शैक्षणिक संस्थानों की सौगात: वर्ष 2004 में उन्होंने छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए तीन बड़े विश्वविद्यालयों की नींव रखी थी। इनमें कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, तकनीकी विश्वविद्यालय (दुर्ग) और पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय (बिलासपुर) शामिल हैं।
सड़क संपर्क (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना): गांवों को मुख्य शहरों से जोड़ने के लिए उनके द्वारा शुरू की गई ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ ने छत्तीसगढ़ के सुदूर बस्तर और सरगुजा जैसे नक्सल प्रभावित और पिछड़े इलाकों तक विकास की रोशनी पहुंचाई।
एक युग का अंत, जो दिलों में हमेशा जीवित रहेगा
16 अगस्त 2018 को भले ही अटल बिहारी वाजपेयी ने शारीरिक रूप से इस दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनके विचार, उनकी कविताएं और उनके द्वारा गढ़े गए राज्य हमेशा अमर रहेंगे। छत्तीसगढ़ की जनता हर साल उनकी पुण्यतिथि और जन्मशताब्दी पर उनके योगदान को कृतज्ञता के साथ याद करती है। आज जब छत्तीसगढ़ अपनी विकास यात्रा के स्वर्णिम आयाम तय कर रहा है, तो हर कदम पर अटल जी का स्वप्न साकार होता दिखाई देता है।





