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ब्लैकलिस्टेड ‘मेसर्स हरी स्टोर्स’ प्रकरण में अनियमितता और गड़बड़ी की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय तक पहुंचा , उच्च स्तरीय जांच का मिला आश्वासन

रायपुर/प्रवक्ता .कॉम 03 सितंबर 2026
स्वास्थ्य विभाग में ब्लैकलिस्टेड फर्म ‘मेसर्स हरी स्टोर्स, धमतरी’ द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से करोड़ों रुपये के टेंडर हासिल करने के मामले की शिकायत आज स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय में दर्ज कराई गई है। प्रवक्ता डॉट कॉम इस मामले को पहले भी प्रमुखता से प्रकाशित कर चुका है। आज स्वास्थ्य मंत्री के विशेष सहायक से मुलाकात कर इस संबंध में विस्तृत शिकायत सौंपी गई और उसकी आधिकारिक पावती प्राप्त की गई। विशेष सहायक ने तथ्यों का संज्ञान लेते हुए मामले की अलग से उच्च स्तरीय जांच कराने और नियमानुसार सख्त कार्रवाई की बात कही है।

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इस मामले में पहले ही खबर के माध्यम से छत्तीसगढ़ की जनता के समक्ष मामले को किया था उजागर 16 जुलाई 26

आखिर क्यों ब्लैकलिस्ट हुई थी मेसर्स हरी स्टोर्स?

मामले की पृष्ठभूमि यह है कि जिला अस्पताल कोंडागांव में टेंडर प्रक्रिया के दौरान फर्म मेसर्स हरी स्टोर्स, धमतरी द्वारा प्रतिष्ठित ‘सीमेंस कंपनी’ (Siemens) का फर्जी और कूट-रचित ऑथराइजेशन सर्टिफिकेट जमा किया गया था। जांच में फर्जीवाड़े के प्रमाणित पाए जाने पर जिला अस्पताल कोंडागांव ने कड़ा कदम उठाते हुए आदेश क्रमांक 401 (दिनांक 17/06/2022) जारी कर फर्म को 3 वर्ष के लिए पूर्णतः ब्लैकलिस्ट (काली सूची में दर्ज) कर दिया था। नियमों के मुताबिक, यह फर्म 17 जून 2022 से 16 जून 2025 तक छत्तीसगढ़ राज्य के किसी भी सरकारी विभाग या निविदा प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पूरी तरह अपात्र और अयोग्य घोषित थी।

फर्जीवाड़े के बावजूद टेंडर मिलने और रिकॉर्ड गायब होने पर सवाल :

इतने गंभीर अपराध में 3 साल के लिए प्रतिबंधित होने के बावजूद फर्म ने न केवल जांजगीर-चांपा में 5 करोड़ से अधिक का बड़ा टेंडर हासिल कर लिया, बल्कि अवधि पूरी होने से पहले ही खुद को ब्लैकलिस्ट से मुक्त भी बता दिया। वहीं आरटीआई से मिले तथ्य के अनुसार जिला अस्पताल कोंडागांव के सरकारी रिकॉर्ड में फर्म को ब्लैकलिस्ट से हटाने संबंधी कोई भी दस्तावेज या आदेश मौजूद ही नहीं है। इसके बावजूद तथाकथित पत्र पर तत्कालीन सिविल सर्जन के हस्ताक्षर होने से उनकी भूमिका पूरी तरह संदिग्ध बनी हुई है।

मामले में ये होंगे जांच के प्रमुख विषय:
& ब्लैकलिस्टिंग की पृष्ठभूमि: सीमेंस कंपनी के फर्जी ऑथराइजेशन सर्टिफिकेट मामले में कोंडागांव जिला अस्पताल द्वारा की गई ब्लैकलिस्टिंग और उस समय की गई औपचारिक कानूनी कार्रवाइयों की समीक्षा।

& विभागीय पोर्टल पर जानकारी: क्या सक्षम अधिकारियों द्वारा फर्म के 3 वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट होने की जानकारी विभागीय पोर्टल पर सार्वजनिक की गई थी या इसे साजिशन दबाया गया।

& प्रतिबंध अवधि से पूर्व हटाने का आधार: ब्लैकलिस्ट की 3 वर्ष की मियाद पूरी होने से पहले ही हरी स्टोर्स को ब्लैकलिस्ट से किसने हटाया, क्यों हटाया, हटाने का आधार क्या था और क्या इसके लिए कोई नियमानुसार दोबारा जांच कराई गई थी।

& कार्यालय का अधिकार क्षेत्र: ब्लैकलिस्ट घोषित करने के बाद जिला अस्पताल कार्यालय ने पुनः अपने ही स्तर पर किस नियम और अधिकार के तहत दोषी कंपनी को ब्लैकलिस्ट से बाहर किया।

& दस्तावेजी प्रक्रिया की सत्यता: ब्लैकलिस्ट घोषित करने और फिर उसे हटाने के लिए जो प्रक्रिया और दस्तावेजी कार्यवाही की गई, उसकी प्रामाणिकता की जांच होगी।

& नअस्पताल रिकॉर्ड व सिविल सर्जन के हस्ताक्षर: आरटीआई के तहत अस्पताल रिकॉर्ड में ब्लैकलिस्ट हटाने से संबंधित कोई भी दस्तावेज मौजूद नहीं है। ऐसे में सामने आया पत्र क्या फर्जी है, यदि हां तो इसे किसने और क्यों तैयार किया, तथा इस पर तत्कालीन सिविल सर्जन के हस्ताक्षर होने के पीछे उनकी क्या भूमिका रही है।

& दोषियों की जवाबदेही: यदि इस पूरी प्रक्रिया में नियम ताक पर रखकर काम हुआ है, तो इसमें किस-किस अधिकारी व कर्मचारी की क्या भूमिका रही है, इसकी जवाबदेही तय की जाएगी।

& जांजगीर-चांपा टेंडर की पड़ताल: जांजगीर-चांपा में ब्लैकलिस्ट अवधि के दौरान 5 करोड़ रुपये से अधिक का सरकारी टेंडर हासिल करने के मामले की जांच की जाएगी कि क्या वहां प्रस्तुत शपथ पत्र और प्रक्रियाएं नियमों के अनुरूप थीं।

स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय का कड़ा रुख:

स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय ने दो टूक और कड़क शब्दों में स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी। जांच में यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है—चाहे उसमें कोई भी अधिकारी, ठेकेदार या अन्य कोई भी व्यक्ति संलिप्त हो—तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने, संपूर्ण राशि की वसूली करने और फर्म को हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट करने जैसी कठोर दंडात्मक कार्रवाइयां सुनिश्चित की जाएंगी।

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