Breaking Newsकाम की खबरछत्तीसगढ़मध्य प्रदेश

मप्र में कर्मचारियों के डीए में 2% की वृद्धि बढ़ोतरी जनवरी से होगा भुगतान, दिवाली के वेतन में नकद जुड़ेगा ,छत्तीसगढ़ में देय तिथि से भुगतान नहीं कर्मचारियों में सुलग रहा रोष नेताओं से पूछ रहे सड़क पर कब उतरेंगे ?

छत्तीसगढ़ के कर्मचारी अब यह पूछने लगे हैं कि आखिर उनके सब्र का बांध कब टूटेगा? समय पर डीए और एरियर न मिलने के खिलाफ सड़क पर उतरने का असली मुहूर्त कब आएगा? क्या कर्मचारी नेताओं को जागने और हक की लड़ाई लड़ने के लिए किसी बड़े आंदोलन का इंतजार है, या फिर वे यूं ही खामोश रहकर कर्मचारियों के अधिकारों का हनन होने देंगे?

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 30 अक्टूबर 2026

Join WhatsApp

मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने राज्य के कर्मचारियों और अधिकारियों के महंगाई भत्ते (DA) में 2% की वृद्धि करने का निर्णय लिया है, जो कि जनवरी से देय होगी। इस घोषणा के बाद मध्य प्रदेश के कर्मचारियों में खुशी की लहर है, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार होने के बावजूद समय पर डीए (DA) न मिलने पर कर्मचारी संगठनों और नेताओं की चुप्पी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

​मध्य प्रदेश में डीए और एरियर भुगतान का पूरा प्लान

वृद्धि: कर्मचारियों और अधिकारियों के डीए में 2% की बढ़ोतरी की गई है, जो जनवरी से प्रभावी होगी।

एरियर भुगतान: जनवरी से सितंबर तक यानी 9 महीने के एरियर का भुगतान तीन समान मासिक किस्तों में किया जाएगा।

नकद भुगतान: अक्टूबर माह के वेतन (जो नवंबर में देय होगा) से बढ़े हुए महंगाई भत्ते का नकद भुगतान शुरू हो जाएगा।

पेंशनर्स के लिए राहत: पेंशनभोगियों की महंगाई राहत (DR) में भी जुलाई 2026 से 2% की वृद्धि की जाएगी। सरकार का कहना है कि वह पेंशनर्स और कर्मचारियों के हितों के साथ सदैव खड़ी है।

​छत्तीसगढ़ में सुस्त रवैया और कर्मचारी नेताओं की चुप्पी पर सवाल

​मध्य प्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी भाजपा की सरकार है, लेकिन इसके बावजूद यहाँ कर्मचारियों को देय तिथि पर महंगाई भत्ता नहीं मिल पा रहा है। छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि आखिर डबल इंजन सरकार होने के बाद भी उनके अधिकारों के प्रति इतनी हीला-हवाली क्यों हो रही है?

​सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस गंभीर मुद्दे पर कर्मचारी संगठनों और नेताओं की चुप्पी पूरी तरह से समझ से परे है। क्या कर्मचारी नेताओं का यह मौन किसी बड़े समझौते की ओर इशारा करता है या फिर उन्हें अपने ही साथियों के हितों की परवाह नहीं है?

​सड़क पर उतरने का मुहूर्त कब आएगा?

​छत्तीसगढ़ के कर्मचारी अब यह पूछने लगे हैं कि आखिर उनके सब्र का बांध कब टूटेगा? समय पर डीए और एरियर न मिलने के खिलाफ सड़क पर उतरने का असली मुहूर्त कब आएगा? क्या कर्मचारी नेताओं को जागने और हक की लड़ाई लड़ने के लिए किसी बड़े आंदोलन का इंतजार है, या फिर वे यूं ही खामोश रहकर कर्मचारियों के अधिकारों का हनन होने देंगे?

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button