2% DA वृद्धि पर भड़का आक्रोश, शिक्षक संगठनों ने साय सरकार की घोषणा को नकारा। “घोषणाओं से पेट नहीं भरता, लंबित एरियर और केंद्र के समान DA दे सरकार”
छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार द्वारा दीपावली के ऐन पहले राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में 2 प्रतिशत की वृद्धि करने की आधिकारिक घोषणा के बाद प्रदेश का माहौल गर्मा गया है। मुख्यमंत्री द्वारा सोशल मीडिया पर दी गई इस ‘सौगात’ को शिक्षक और कर्मचारी संगठनों ने सिरे से खारिज करते हुए भारी नाराजगी जताई है। संगठनों का स्पष्ट कहना है कि केंद्र की तुलना में यह बढ़ोतरी बेहद कम है और बकाया एरियर (बचे हुए भुगतान) पर सरकार की चुप्पी ने उनकी दीपावली की खुशियों को मायूसी में बदल दिया है।इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रदेश के प्रमुख शिक्षक और कर्मचारी संगठनों के अध्यक्षों व संयोजकों ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है,
• रविन्द्र राठौर ( प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक , शिक्षक समग्र फ़ेडरेशन ): ” शिक्षक और कर्मचारी लगातार बढ़ती महंगाई का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में महंगाई भत्ते की किस्तों में वृद्धि और एरियर के भुगतान को लेकर अनिश्चितता कर्मचारियों में असंतोष बढ़ाती है। केंद्र और राज्य के DA में अंतर का खामियाजा आखिरकार कर्मचारियों को ही भुगतना पड़ता है। सरकार को कर्मचारी हितों के प्रति गंभीरता दिखाते हुए लंबित एरियर पर निर्णय लेना चाहिए और महंगाई भत्ते में संशोधन करते हुए 1 नवम्बर से 63% करना सुनिश्चित करना चाहिए।”

• प्रदीप पाण्डेय (प्रदेश अध्यक्ष, सर्व शिक्षक संघ): “छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महंगाई भत्ते में 2 प्रतिशत की वृद्धि करना कर्मचारियों की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है और कर्मचारी मायूस हैं। केंद्र और राज्य के कर्मचारियों के बीच महंगाई भत्ते का अंतर लगातार बना हुआ है। केंद्र में 63 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 60 प्रतिशत DA होने की स्थिति में कर्मचारियों को अपने ही राज्य में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार ने वृद्धि तो की, लेकिन एरियर के भुगतान पर स्थिति स्पष्ट नहीं की। कर्मचारियों को घोषणाओं से अधिक ठोस निर्णय और समय पर भुगतान चाहिए।”
• विकास सिंह राजपूत (प्रदेश अध्यक्ष, नवीन शिक्षक संघ):”महंगाई भत्ता कर्मचारियों पर कोई एहसान नहीं, बल्कि बढ़ती महंगाई से राहत देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। जब बाजार में खाद्य सामग्री, पेट्रोल, गैस और रोजमर्रा की जरूरतों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, तब केवल 2 प्रतिशत की वृद्धि और एरियर पर चुप्पी कर्मचारियों की परेशानी कम नहीं कर सकती। सरकार को केंद्र के समान महंगाई भत्ता देने और बकाया राशि के भुगतान के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करनी चाहिए।”
• मोहम्मद यासीर इरफ़ान (प्रवक्ता, सर्व शिक्षक संघ):“सरकार को यह समझना चाहिए कि महंगाई भत्ता केवल वेतन का आंकड़ा नहीं, बल्कि परिवार के मासिक बजट से जुड़ा विषय है। 2 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद केंद्र और राज्य के बीच अंतर बना रहना तथा एरियर का भुगतान स्पष्ट नहीं होना कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय है। त्योहारों और घरेलू खर्चों के बीच कर्मचारियों को वास्तविक आर्थिक राहत की जरूरत है, न कि केवल घोषणा की।”
• लैलून भारद्वाज (संयोजक, छत्तीसगढ़ शिक्षक साझा मंच):”छत्तीसगढ़ के शिक्षक और कर्मचारी भी उसी महंगाई का सामना करते हैं, जिसका सामना देश के दूसरे राज्यों के कर्मचारी करते हैं। फिर महंगाई भत्ते में समानता के लिए उन्हें इंतजार क्यों करना पड़े? 2 प्रतिशत की वृद्धि के बाद भी यदि केंद्र और राज्य के DA में अंतर बना हुआ है और एरियर के भुगतान पर निर्णय नहीं होता, तो कर्मचारियों की नाराजगी स्वाभाविक है। सरकार को इस मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।”
• जाकेश साहू (अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ):”महंगाई भत्ते की घोषणा के साथ उसके वास्तविक लाभ और एरियर के भुगतान की स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए। कर्मचारियों को अपने वेतन का बजट बनाना होता है और लंबित भुगतान उनकी आर्थिक योजनाओं को प्रभावित करता है। सरकार को चाहिए कि महंगाई भत्ते में केंद्र और राज्य के अंतर को दूर करने के लिए ठोस पहल करे तथा बकाया राशि के भुगतान पर स्पष्ट आदेश जारी करे। कर्मचारियों की आर्थिक राहत को अनिश्चितता में नहीं रखा जाना चाहिए।”
फिलहाल, साय सरकार की इस 2% DA बढ़ोतरी ने राहत देने के बजाय राज्य में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि कर्मचारी वर्ग के इस चौतरफा आक्रोश और 63% DA की मांग के बाद सरकार अपने आदेश में कोई संशोधन करती है या नहीं।






