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मेसर्स हरी स्टोर्स धमतरी पर करोड़ों के टेंडर घोटाले का बड़ा आरोप: मुख्यमंत्री, डायरेक्टर हेल्थ सहित 3 जिलों के कलेक्टर्स और NMDC हैदराबाद मुख्यालय तक पहुँची शिकायत, निष्पक्ष जांच की मांग

प्रवक्ता.कॉम 06, जुलाई 2026
रायपुर/कोंडागांव/जांजगीर-चांपा/दंतेवाड़ा:
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग और नवरत्न सार्वजनिक उपक्रम एनएमडीसी (NMDC) लिमिटेड में कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेजों और फर्जी शपथ पत्र के सहारे करोड़ों रुपये का टेंडर हथियाने के मामले में विवादित फर्म मेसर्स हरी स्टोर्स, धमतरी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। इस कथित महाघोटाले और प्रशासनिक सिंडिकेट से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर यह संवेदनशील मामला अब राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक गलियारों से लेकर केंद्रीय उपक्रम के शीर्ष प्रबंधन तक पहुँच गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन गंभीर आरोपों और पत्राचारों के आधार पर माननीय मुख्यमंत्री (CM) छत्तीसगढ़, संचालक (Director) स्वास्थ्य सेवाएं, मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) NMDC हैदराबाद मुख्यालय, तथा जांजगीर-चांपा, दंतेवाड़ा और कोंडागांव के जिला कलेक्टर्स को औपचारिक रूप से शिकायतें प्रेषित की गई हैं। शिकायत में सभी स्तरों पर मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच और विधिक कार्यवाही सुनिश्चित करने की पुरज़ोर मांग उठाई गई है।

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क्या हैं आरोप? (विवाद और टेंडरों की क्रोनोलॉजी)

शिकायत के अनुसार, उपकरण निर्माता कंपनी का फर्जी ऑथराइजेशन सर्टिफिकेट जमा करने के आरोप में मेसर्स हरी स्टोर्स, कृषि उपज मंडी, धमतरी को जिला अस्पताल कोंडागांव द्वारा कथित तौर पर 3 वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट (काली सूची) में डाला गया था। नियमतः इस फर्म को प्रतिबंधित समयावधि में छत्तीसगढ़ राज्य के किसी भी सरकारी विभाग, निविदा प्रक्रिया या किसी सार्वजनिक उपक्रम में भाग लेने के लिए अपात्र होना था।


परंतु, इस कथित अपात्रता और प्रतिबंध को छुपाते हुए, इसी समयावधि के भीतर दो अलग-अलग विभागों में करोड़ों रुपये के टेंडर हासिल किए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं:

  1. जांजगीर-चांपा में ₹5 करोड़ के टेंडर का मामला: आरोप है कि वित्तीय वर्ष के दौरान CMHO कार्यालय जांजगीर-चांपा द्वारा जिला अस्पताल एवं अकलतरा सामुदायिक केंद्र में ऑपरेशन थियेटर मॉड्यूलेशन व अपग्रेडेशन हेतु “Customized AMC/CMC & Modular OT” का टेंडर जारी किया गया था। शिकायत के अनुसार, इस फर्म ने निविदा में स्वयं को “गैर-प्रतिबंधित” बताते हुए एक शपथ पत्र प्रस्तुत किया और इसी के आधार पर लगभग ₹5 करोड़ का टेंडर हासिल कर लिया।
  2. NMDC लिमिटेड (दंतेवाड़ा क्षेत्र) में ₹16.76 करोड़ का विवाद: इसी कथित समयावधि के भीतर मेसर्स हरी स्टोर्स पर एनएमडीसी (NMDC) लिमिटेड को भी अंधेरे में रखकर दो बड़े टेंडर हथियाने के आरोप लगे हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि फर्म ने किरन्दुल प्रोजेक्ट अस्पताल हेतु ₹5,14,76,419.95 का कार्य आदेश तथा बचेली प्रोजेक्ट अस्पताल हेतु ₹11,61,38,841.00 का Turnkey कार्यादेश प्राप्त किया। इसके साथ ही इन टेंडरों की दरों को लेकर भी विसंगतियों के आरोप लगाए गए हैं।
    विवाद का मुख्य केंद्र: कोंडागांव का ‘कथित रिमूवल पत्र’
    इस फर्म को विभिन्न निविदाओं में पात्र दिखाने के उद्देश्य से कोंडागांव के तत्कालीन Civil Surgeon द्वारा अपने शासकीय पद का दुरुपयोग कर एक कथित ‘दोषमुक्ति पत्र’ जारी करने के आरोप हैं, जिसमें हरी स्टोर्स को ब्लैकलिस्ट से हटाने का दावा किया गया था।

इस पूरे प्रकरण में नया मोड़ तब आया जब सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जिला अस्पताल कोंडागांव की जन सूचना शाखा द्वारा यह जानकारी दिए जाने का दावा किया गया कि ऐसी किसी भी पुनः जांच या ब्लैकलिस्ट हटाने से संबंधित कोई भी दस्तावेज या आधिकारिक आदेश कार्यालय के रिकॉर्ड या किसी शाखा में उपलब्ध ही नहीं है। इसी आधार पर शिकायत में आशंका जताई गई है कि उक्त रिमूवल पत्र कूट-रचित हो सकता है, जिसके सहारे जगह-जगह काम लिए गए। हालांकि, इस पत्र की प्रामाणिकता क्या है, यह जांच का विषय है।
मामले की वस्तुस्थिति और आरोपों की सत्यता का पता लगाने के लिए इन सभी प्रमुख ज़िम्मेदार स्तरों पर औपचारिक पत्र भेजकर संज्ञान लेने की मांग
माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय (छत्तीसगढ़)
संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं (डायरेक्टर हेल्थ, रायपुर)
मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) एवं CMD, NMDC हैदराबाद मुख्यालय
कलेक्टर, जिला जांजगीर-चांपा
कलेक्टर, जिला दंतेवाड़ा
कलेक्टर एवं CMHO, जिला कोंडागांव
विभागीय सांठगांठ और तकनीकी जांच के दायरे में अधिकारी
इस पूरे मामले में अब स्वास्थ्य विभाग के तकनीकी विंग और निविदा समिति (Tender Committee) की भूमिका पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि जब कोई फर्म राज्य के किसी एक जिले में आधिकारिक तौर पर प्रतिबंधित की जाती है, तो उसकी जानकारी केंद्रीय पोर्टल या विभाग के आंतरिक नेटवर्क पर अपडेट क्यों नहीं हुई?
शिकायत में यह अंदेशा भी जताया गया है कि स्थानीय स्तर के कुछ अधिकारियों ने जानबूझकर दस्तावेजों के भौतिक और तकनीकी सत्यापन (Physical & Technical Verification) की प्रक्रिया की अनदेखी की, जिससे एक दागी फर्म को करोड़ों के संवेदनशील चिकित्सा टेंडर आसानी से मिल गए। अब जांच का दायरा केवल फर्म तक सीमित न रहकर, निविदा को तकनीकी हरी झंडी देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की ओर भी घूम सकता है।
विशेषज्ञों की राय और निष्पक्ष जांच की मांग
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि शासकीय टेंडरों में ब्लैकलिस्टिंग की जानकारी छुपाना या कूट-रचित दस्तावेजों का उपयोग करना एक गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता की श्रेणी में आता है। शिकायत में साफ तौर पर मांग की गई है कि इस पूरे प्रकरण और संबंधित दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) / आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) या किसी उच्च स्तरीय विशेष तकनीकी समिति से कराई जाए, ताकि यह पूरी तरह स्पष्ट हो सके कि इन टेंडरों में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं, और दोषी पाए जाने पर संबंधित पक्षों पर नियमानुसार कार्यवाही की जा सके।

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