विशेष रिपोर्ट: आबंटन के बाद भी जनगणना कर्मचारियों को मानदेय का इंतजार, राजधानी रायपुर में भी सुस्त है प्रशासनिक मशीनरी गृह मंत्रालय ने दिया है जल्द भुगतान के निर्देश

रायपुर प्रवक्ता. कॉम 17 जुलाई 2026
रायपुर: छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 के प्रथम चरण (मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना) में अपनी सेवाएं देने वाले मैदानी कर्मचारियों का सब्र अब जवाब देने लगा है। सरकार ने बजट आबंटित कर दिया है, आदेश जारी हो चुके हैं, लेकिन फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की जेब अभी भी खाली है। सबसे हैरानी की बात यह है कि राज्य की राजधानी रायपुर में भी मानदेय का भुगतान ठप पड़ा है।
’प्रवक्ता. कॉम’ ने उठाया था देरी का मुद्दा
इस पूरे मामले में ‘प्रवक्ता. कॉम’ की भूमिका बेहद अहम रही है। मानदेय भुगतान में हो रही अनावश्यक देरी और कर्मचारियों की भीषण गर्मी में की गई मेहनत को ‘प्रवक्ता. कॉम’ ने सबसे पहले प्रमुखता से उठाया था। इस मुद्दे के तूल पकड़ने के बाद ही शासन हरकत में आया और मानदेय के लिए बजट आबंटन की प्रक्रिया तेज हुई।
क्या कहती है शासन की फाइल?


छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश (क्रमांक GENS-2101/330/2026-HOME SECTION) के मुताबिक:
राज्य के सभी 33 जिलों के लिए कुल 58,60,51,600 रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
गृह विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस राशि का उपयोग जनगणना कार्य में लगे फील्ड फंक्शनरीज के मानदेय भुगतान के लिए किया जाए।
बावजूद इसके, प्रशासनिक सुस्ती के कारण यह राशि अभी तक धरातल पर कर्मचारियों तक नहीं पहुंच पाई है।
अब निदेशालय के निर्देश, उम्मीदों पर टिकी नजरें

लगातार उठ रहे सवालों और कर्मचारियों के आक्रोश को देखते हुए, गृह मंत्रालय के अधीन ‘जनगणना कार्य निदेशालय’ ने भी अब कड़ा रुख अपनाया है। निदेशालय ने सभी जिला कलेक्टरों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अविलंब भुगतान की प्रक्रिया पूरी करें।
सवाल अब भी बरकरार:
बजट का आबंटन हो चुका है, आदेश की प्रतियां जिलों तक पहुंच चुकी हैं, फिर आखिर किस तकनीकी पेंच में रायपुर जैसी राजधानी में मानदेय फंसा हुआ है? क्या जिला प्रशासन अब भी निदेशालय के निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहा है? फील्ड पर तैनात कर्मचारी अब भी इस सवाल का जवाब खोज रहे हैं कि उनके पसीने की कमाई उनके खाते में कब आएगी?





