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बस्तर में सहकारिता का महामंथन : जगदलपुर में जुटेगा देश भर का नेतृत्व, आधुनिक खेती से एथेनॉल क्रांति तक का खिंचेगा रोडमैप

रायपुर/प्रवक्ता. कॉम/07 अक्टूबर 2026

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जगदलपुर (बस्तर):बस्तर की पावन धरा जगदलपुर में 8 और 9 अक्टूबर को ऐतिहासिक राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। इस दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर के वरिष्ठ नीति-निर्माता, सहकारिता विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी जुटेंगे। इस महामंथन का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक सहकारी व्यवस्था को तकनीकी, डिजिटल और आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप ढालना है। सम्मेलन में एम-पैक्स के सशक्तिकरण, भंडारण तंत्र, सहकारी बैंकिंग के आधुनिकीकरण और कृषि प्रसंस्करण आधारित उद्योगों पर विस्तृत रणनीति तैयार की जाएगी।

सम्मेलन के प्रमुख एजेंडे और केंद्रीय बिंदु:

प्राथमिक समितियों (एम-पैक्स) का राष्ट्रीय नेटवर्क :छत्तीसगढ़ में अब तक 2,058 राज्य समितियों और 412 नाफेड-संबद्ध एम-पैक्स का पंजीयन हो चुका है। सम्मेलन में इस बात पर विचार होगा कि कैसे इन समितियों को निर्यात, जैविक उत्पाद और बीज वितरण का मुख्य केंद्र बनाया जाए। वर्तमान में राज्य की 1,681 समितियां राष्ट्रीय निर्यात, 1,633 जैविक सहकारी और 1,746 समितियां बीज सहकारी संघों से जुड़ चुकी हैं।

डिजिटल सेवाएं व कोर सहकारी बैंकिंग :ग्रामीण अंचलों में किसानों को बैंकिंग सेवाओं के लिए शहरों पर निर्भर न रहना पड़े, इसके लिए समितियों को पूरी तरह डिजिटल और माइक्रो-एटीएम जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का मॉडल पेश किया जाएगा।

वैज्ञानिक भंडारण एवं लॉजिस्टिक्स: फसल कटाई के बाद किसानों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए विकेंद्रीकृत वेयरहाउसिंग और कोल्ड चेन नेटवर्क के विस्तार पर रणनीति बनेगी।

एथेनॉल क्रांति : सहकारिता से उद्योग और समृद्धि का संगम : सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के सफल एथेनॉल मॉडल को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे ग्रामीण आय और रोजगार में बड़ा बदलाव आया है:

कोंडागांव मॉडल (80 KLPD): मक्का उत्पादक आदिवासी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का सीधा सुरक्षा चक्र मिला है। इस संयंत्र से न केवल फसल का मूल्य संवर्धन हुआ, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए तकनीकी व गैर-तकनीकी रोजगार के नए रास्ते खुले हैं।

भोरमदेव पीपीपी मॉडल (80 KLPD): सहकारी शक्कर कारखाने के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) में स्थापित इस संयंत्र ने चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति सुधारने और उन्हें नियमित लाभ देने का सफल रास्ता दिखाया है।

तीन नए संयंत्रों की तैयारी: पंडरिया, अंबिकापुर और बालोद में तीन और एथेनॉल संयंत्रों की स्थापना का काम प्रगति पर है। सम्मेलन में इन संयंत्रों के जरिए भविष्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने पर मंथन होगा

।बस्तर से निकलेगा देश के लिए नया मॉडल : सम्मेलन का समापन आगामी वर्षों के लिए एक साझा कार्ययोजना (Action Plan) के साथ होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ के मैदानी और वनांचल क्षेत्रों में लागू सफल पहलों के आधार पर देश के अन्य राज्यों के लिए भी सहकारिता का व्यावहारिक ढांचा तय किया जाएगा।

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