
बिलासपुर /रायपुर प्रवक्ता .कॉम
12 जून 2026
शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और ईमानदारी की बातें केवल कागजी दावों तक सीमित रह गई हैं। हालिया प्रशासनिक फैसलों ने “तबादलों पर उठते सवाल” की फेहरिस्त को और लंबा कर दिया है। न्यायधानी बिलासपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरी व्यवस्था की निष्पक्षता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यहाँ नियमों और वरिष्ठता (Seniority) को पूरी तरह दरकिनार करके ‘सिंगल बैकडोर’ (पिछले दरवाजे) से एक चहेते अधिकारी को उपकृत किया गया है। महज 6 महीने पहले प्रमोट होकर प्राचार्य बने एक जूनियर अधिकारी को सीधे जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) जैसी मलाईदार और जिम्मेदारी भरी कुर्सी सौंप दी गई है।
इस मनमानी को देखकर कतार में खड़े सीनियर अधिकारी और आम जनता सिर्फ एक ही बात कह रहे हैं—”धन्य है ऐसी व्यवस्था!”
क्या है पूरा मामला?

6 महीने पहले प्रमोट हुए रामेश्वर जायसवाल बने नए DEO, सीनियरिटी दरकिनार
इस व्यवस्था का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब तत्कालीन डीईओ विजय टांडे का तबादला सक्ती कर दिया गया। उनके स्थान पर बिलासपुर का नया प्रभारी डीईओ रामेश्वर जायसवाल को बनाया गया है।
तबादलों पर उठते सवाल: रामेश्वर जायसवाल को मात्र 6 महीने पहले ही प्राचार्य के पद पर पदोन्नत किया गया था।
जिले में कई ऐसे सीनियर प्राचार्य और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यरत हैं, जिनकी वरिष्ठता को पूरी तरह से नजरअंदाज कर सीधे पिछले दरवाजे (सिंगल बैकडोर) से एक जूनियर को इतनी बड़ी कुर्सी सौंप दी गई।
तबादलों पर उठते सवाल:
क्या ऐसी होती है पारदर्शिता?
इस एक आदेश ने शिक्षा विभाग के भीतर चल रहे ट्रांसफर और पोस्टिंग के बड़े रैकेट की तरफ इशारा किया है। विभाग के गलियारों में अब तीखे सवाल तैर रहे हैं:
सीनियरिटी का कत्ल क्यों?
योग्यता और सालों की सीनियरिटी को दरकिनार कर केवल ‘विशेष मेहरबानी’ के दम पर टॉप पोस्ट क्यों बांटी जा रही हैं?
बैकडोर की खिड़की किसके लिए खुली? जब सरकार हर प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने का ढिंढोरा पीटती है, तो यह ‘सिंगल बैकडोर’ की व्यवस्था किसके रसूख से चलाई जा रही है?
”यह उन सभी सीनियर प्राचार्यों और ईमानदार अधिकारियों के गाल पर तमाचा है जो सालों से निष्ठापूर्वक अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। जब जूनियर को सीधे टॉप पोस्ट पर बैठा दिया जाए, तो व्यवस्था की साख पूरी तरह खत्म हो जाती है।”
— (शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी, नाम न छापने की शर्त पर)
अधिकारियों में भारी आक्रोश, कोर्ट जाने की तैयारी
बिलासपुर के इस ‘बैकडोर’ आदेश के बाद प्रदेश भर के शिक्षक संगठनों और प्रशासनिक अधिकारियों में भारी आक्रोश है। दबी जुबान में इसे ‘लेन-देन और रसूख का खेल’ बताया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि वरिष्ठता की ऐसी खुली अनदेखी के खिलाफ अब इस ट्रांसफर ऑर्डर को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी की जा रही है।





