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तकनीकी खामी या नेटवर्क का खेल? छत्तीसगढ़ में समय पर स्कूल पहुंचकर भी ‘अनुपस्थित’ हो रहे शिक्षक; VSK ऐप बना सिरदर्द

जब ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में इंटरनेट और नेटवर्क का बुनियादी ढांचा ही मजबूत नहीं है, तो ऐसी अनिवार्य व्यवस्था क्यों थोपी जा रही है?

रायपुर /पेंड्रा रोड/ गरियाबंद

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प्रवक्ता.कॉम 06 जुलाई 2026


​रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा स्कूली शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए लागू किया गया ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ (VSK) ऑनलाइन अटेंडेंस ऐप इन दिनों शिक्षकों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। प्रदेश में कड़ाई से लागू किए गए इस नियम के तहत डिजिटल हाजिरी न बनने पर शिक्षकों का वेतन रोकने का प्रावधान है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शिक्षक समय से पहले स्कूल तो पहुंच रहे हैं, पर खराब नेटवर्क और सर्वर डाउन होने की वजह से ऐप पर उनकी हाजिरी (चेक-इन) दर्ज ही नहीं हो पा रही है।
​राजधानी रायपुर समेत बिलासपुर, पेंड्रा और गरियाबंद जैसे कई जिलों से ऐसी शिकायतें आ रही हैं, जहां तकनीकी गड़बड़ियों के कारण शिक्षक परेशान हैं।
​समय पर पहुंचने के बाद भी ऐप दिखा रहा ‘बाहर’ या ‘सर्वर एरर’
​शासन के नियमानुसार, शिक्षकों को स्कूल परिसर के 100 मीटर के दायरे (जियोफेंसिंग) में रहकर सुबह ऐप पर लॉग-इन करना होता है। लेकिन शिक्षकों का कहना है कि:
​नेटवर्क की भारी समस्या:

गरियाबंद और पेंड्रा के वनांचल एवं ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ बिलासपुर और रायपुर के कुछ बाहरी क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की स्थिति बेहद खराब है।
​लोकेशन की गड़बड़ी:

कई शिक्षक स्कूल के भीतर खड़े होकर भी हाजिरी लगाने का प्रयास करते हैं, तो ऐप उन्हें स्कूल की तय सीमा से 5 या 10 किलोमीटर दूर दिखाता है।
​सर्वर डाउन: एक साथ हजारों शिक्षकों द्वारा ऐप का उपयोग किए जाने पर सर्वर पूरी तरह ठप हो जाता है, जिससे केवल ‘लोडिंग’ का चक्र घूमता रहता है।
वेतन कटने का डर:

स्कूल शिक्षा विभाग के सख्त निर्देशों के मुताबिक, यदि VSK ऐप में उपस्थिति दर्ज नहीं पाई जाती, तो उसे ‘शून्य’ मानकर उस दिन या पूरे महीने का वेतन रोकने तक की कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में समय पर स्कूल आकर भी शिक्षक अपनी गैर-हाजिरी लगने से बेहद चिंतित और आक्रोशित हैं।
​विभाग ने झाड़ा पल्ला, शिक्षक संगठनों ने पूछा- “कौन है जिम्मेदार?”
​इस गंभीर तकनीकी खामी और नेटवर्क के अभाव को लेकर शिक्षा विभाग के स्थानीय अधिकारियों के पास फिलहाल कोई ठोस जवाब नहीं है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह एक केंद्रीयकृत डिजिटल सिस्टम है और ऐसी तकनीकी खामियों की मॉनिटरिंग राज्य स्तर पर की जा रही है, हालांकि मैदानी स्तर पर आ रही दिक्कतों का तत्काल कोई विकल्प नहीं दिया गया है।
​दूसरी तरफ, प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संघों ने सरकार और विभाग के इस ‘डिजिटल प्रयोग’ पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

शिक्षक नेताओं का कहना है कि:

छत्तीसगढ़ शिक्षक महासंघ के नरेंद्र सिंह ठाकुर, मोहन सिंह राजपूत, पवन साहू, प्रमोद झा ने बताया है कि
​जब ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में इंटरनेट और नेटवर्क का बुनियादी ढांचा ही मजबूत नहीं है, तो ऐसी अनिवार्य व्यवस्था क्यों थोपी जा रही है?
​यदि विभाग का सर्वर डाउन है या जियो-लोकेशन गलत बता रही है, तो उसकी सजा शिक्षकों को वेतन काटकर क्यों दी जा रही है?
​शिक्षक का मुख्य काम बच्चों को पढ़ाना है, या पूरे दिन मोबाइल हाथ में लेकर नेटवर्क तलाशना और माथापच्ची करना है?

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