वीएसके (VSK) एप तकनीकी खामियों का शिकार: शिक्षक परेशान, सिस्टम ‘रियलिटी टेस्ट’ में फेल

रायपुर/बिलासपुर/ मुंगेली/ कबीरधाम 21 अगस्त 2026
(विजय सिंह ठाकुर)
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ (VSK) एप अब खुद ही तकनीकी खामियों के जाल में उलझ गया है। विभागीय मंत्री के तमाम आश्वासनों के बावजूद, धरातल पर स्थिति यह है कि रायपुर, बिलासपुर और कबीरधाम जैसे प्रमुख जिलों में भी यह सिस्टम ‘रियलिटी टेस्ट’ में पूरी तरह फेल साबित हो रहा है। एप की तकनीकी त्रुटियों के कारण प्रदेश भर के शिक्षक भारी मानसिक और प्रशासनिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
मुख्य खामियाँ, जो बनीं शिक्षकों के लिए सिरदर्द:
गलत रिपोर्टिंग:

वर्तमान में एप की सबसे बड़ी विसंगति यह है कि यह अवकाश (लीव) पर गए शिक्षकों को भी ‘एब्सेंट’ (अनुपस्थित) दिखाता है, जिससे शिक्षकों की सेवा पुस्तिका पर गलत प्रभाव पड़ रहा है।
पोर्टल के बीच सामंजस्य का अभाव:
लीव पोर्टल और वीएसके एप के बीच कोई तकनीकी लिंक नहीं है, जिसके चलते शिक्षकों को दोहरी मेहनत करते हुए दोनों ही प्लेटफार्मों पर अनिवार्य एंट्री करनी पड़ रही है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव:
सेवानिवृत्त होकर पुनर्नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों, तथा विधायक, मंत्री या सांसद कार्यालय में संलग्न शिक्षकों के लिए एप में कोई विकल्प ही नहीं है।
लॉगिन-लॉगआउट की गड़बड़ी और सर्वर की लाचारी
शिक्षकों का कहना है कि इस एप का सर्वर बेहद कमजोर है। स्कूल के क्लासरूम में बैठकर अटेंडेंस लगाने पर यह लोकेशन कभी 650 मीटर तो कभी 2 किलोमीटर दूर बता देता है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि लॉगिन के समय यह ‘लॉगआउट’ दिखाता है और लॉगआउट के समय ‘लॉगिन’ का विकल्प आ जाता है। एप की लोकेशन एक्यूरेसी पूरी तरह गड़बड़ है, जिसके चलते समय पर अटेंडेंस दर्ज करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
इन इलाकों में सबसे बुरा हाल
रायपुर:
सेजबहार, जोरा, सीरीखेड़ी सहित शहर के अंदरूनी संकुलों के स्कूलों में यह समस्या आम है।
बिलासपुर:
सरकंडा, कोनी और बिल्हा सहित कई ब्लॉकों के शिक्षक इससे जूझ रहे हैं।
मुंगेली:
करही, दाऊ पारा और पड़ाव चौक क्षेत्र के कई स्कूलों का यही हाल है।
कबीरधाम:
कैलाशनगर, कचहरी पारा, रामनगर, पंडरिया के कुकदूर, कुंडा और बोड़ला के स्कूलों में भी वीएसके एप की एक्यूरेसी जवाब दे चुकी है।
पोर्टल अपडेट न होना:

शालाओं के मर्जर (विलय) की प्रक्रिया को पूरा हुए साल भर से अधिक हो चुका है, लेकिन आज भी वीएसके, सीजीस्कूल और इन्स्पायर जैसे सरकारी पोर्टल्स में डेटा अपडेट नहीं हुआ है, जिससे शिक्षकों को स्थानांतरण या अन्य कार्यों के दौरान पुराने और नए कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
833 शिक्षक अब भी पंजीकरण से दूर
ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अभी भी 833 शिक्षक वीएसके पोर्टल पर पंजीकृत नहीं हैं। यह आंकड़ा सिस्टम की सुस्ती और तकनीकी बाधाओं को उजागर करने के लिए पर्याप्त है।
शिक्षकों पर मनोवैज्ञानिक दबाव का आरोप
शिक्षक संगठनों और शिक्षकों का मानना है कि इस त्रुटिपूर्ण प्रणाली को जबरन जारी रखने का एकमात्र मकसद शिक्षकों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाए रखना है, ताकि इसी बहाने उनकी सख्त और दमघोंटू निगरानी की जा सके।
डिजिटल इंडिया के इस दौर में वीएसके एप का उद्देश्य सरलता लाना था, लेकिन आज यह एप तकनीकी खामियों के कारण स्वयं एक जटिल समस्या बन चुका है। विभागीय अधिकारी यदि जल्द ही इन खामियों को दुरुस्त नहीं करते हैं, तो यह सरकारी महकमे की कार्यक्षमता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता रहेगा।





