राष्ट्र निर्माण व समरसता के प्रखर संवाहक: 76 के हुए आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत
1975 के आपातकाल के कठिन दौर में उन्होंने गुप्त रूप से संगठन की गतिविधियों को संभाला। इसके बाद अकोला, नागपुर और बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करते हुए वे संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे। वर्ष 2000 में वे संघ के 'सरकार्यवाह' (महासचिव) चुने गए और 2009 में के. एस. सुदर्शन के पदमुक्त होने के बाद उन्होंने छठे सरसंघचालक के रूप में कमान संभाली।
प्रवक्ता.कॉम 11 सितंबर 2026
विशेष प्रतिनिधि, नई दिल्ली/नागपुर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शुक्रवार (11 सितंबर) को 76 वर्ष के हो गए हैं। संघ प्रमुख के जन्मदिन के अवसर पर देशभर से विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक हस्तियों ने उन्हें शुभकामनाएं भेजी हैं।
विगत 17 वर्षों से विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन का नेतृत्व कर रहे डॉ. भागवत का जीवन संगठन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रनिष्ठा का प्रतीक माना जाता है।
पशुचिकित्सक से संघ प्रमुख तक की यात्रा
11 सितंबर 1950 को महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में एक निष्ठावान संघ परिवार में जन्मे मोहन भागवत का बचपन नागपुर में बीता। नागपुर के पशुचिकित्सा कॉलेज से स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने किसी पेशेवर करियर को चुनने के बजाय 1975 में राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया और संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए।
1975 के आपातकाल के कठिन दौर में उन्होंने गुप्त रूप से संगठन की गतिविधियों को संभाला। इसके बाद अकोला, नागपुर और बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करते हुए वे संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे। वर्ष 2000 में वे संघ के ‘सरकार्यवाह’ (महासचिव) चुने गए और 2009 में के. एस. सुदर्शन के पदमुक्त होने के बाद उन्होंने छठे सरसंघचालक के रूप में कमान संभाली।
नेतृत्व में आधुनिकता और सामाजिक समरसता
डॉ. भागवत के कार्यकाल में संघ ने वैचारिक मजबूती के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण संगठनात्मक और सामाजिक सुधार देखे हैं:
आधुनिक स्वरूप: संगठन के 90 साल पुराने गणवेश (यूनिफॉर्म) में खाकी हाफ पैंट की जगह डार्क ब्राउन पैंट को शामिल करवाकर उन्होंने समय के अनुकूल बदलाव का स्पष्ट संदेश दिया।
सामाजिक समरसता का मंत्र:
जातिगत भेदभाव मिटाने के लिए उन्होंने समाज में “एक मंदिर, एक कुआं और एक श्मशान” के विचार को प्रमुखता दी।
पर्यावरण व कुटुंब प्रबोधन:
संघ के कार्यों में जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और पारिवारिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए ‘कुटुंब प्रबोधन’ जैसे प्रकल्पों को शुरू कराया।
व्यापक संवाद:
हाल ही में संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में उन्होंने वैश्विक स्तर पर संवाद अभियानों का नेतृत्व किया। लंदन व अन्य देशों के दौरों के दौरान उन्होंने राष्ट्र निर्माण, ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और नागरिक अनुशासन पर बल दिया।
दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और गणमान्य नागरिकों ने उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की है। केंद्रीय नेताओं ने अपने संदेशों में कहा कि डॉ. भागवत का जीवन व्यक्ति से ऊपर समाज और समाज से ऊपर राष्ट्र को रखने की प्रेरणा देता है।

