विभागीय TET पर शिक्षक साझा मंच ने सौंपा मांगपत्र, परीक्षा से लेकर सेवा सुरक्षा तक स्पष्ट नीति की मांग CBT प्रशिक्षण, गृह जिले में परीक्षा केंद्र, उत्तीर्ण अंकों में राहत और नौकरी-पदोन्नति पर स्पष्ट प्रावधान बनाने शासन से आग्रह
रायपुर/ प्रवक्ता डॉट कॉम/23 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ में सेवारत शिक्षकों के लिए प्रस्तावित विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर शिक्षक साझा मंच ने अपनी सक्रियता तेज करते हुए शासन के समक्ष 11 सूत्रीय मांगपत्र प्रस्तुत किया है। मंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के संचालक से परीक्षा की पूरी रूपरेखा स्पष्ट करने तथा सेवारत शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखकर व्यावहारिक और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
मंच का कहना है कि विभागीय TET का आयोजन केवल परीक्षा कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रदेश के हजारों शिक्षकों की सेवा, पदोन्नति और भविष्य की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलू जुड़े हुए हैं। ऐसे में परीक्षा संबंधी नियमों के साथ सेवा पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर भी शासन की स्पष्ट नीति सामने आनी चाहिए, ताकि शिक्षकों को किसी प्रकार की अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।
परीक्षा की समय-सारिणी से लेकर CBT प्रशिक्षण तक उठाए मुद्दे : मांगपत्र में परीक्षा की तिथि, पाठ्यक्रम और आवेदन प्रक्रिया समय रहते घोषित करने पर जोर दिया गया है। मंच ने प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षाओं के लिए ऐसी समय-सारिणी निर्धारित करने की मांग की है, जिससे दोनों स्तरों की परीक्षा देने के इच्छुक शिक्षक अवसर से वंचित न हों। इसके साथ ही CBT प्रणाली से परिचित कराने के लिए प्रशिक्षण और मॉक टेस्ट आयोजित करने तथा प्रत्येक जिले में पर्याप्त परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया है।

मंच ने परीक्षा में आरक्षित वर्ग के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत और अनारक्षित वर्ग के लिए 50 प्रतिशत उत्तीर्ण अंक निर्धारित करने का प्रस्ताव भी रखा है। प्रश्नपत्र में बाल मनोविज्ञान, अध्यापन कौशल और विद्यालयीन गतिविधियों से संबंधित विषयों को पर्याप्त महत्व देने की मांग की गई है। परीक्षा के दौरान सर्वर या नेटवर्क संबंधी तकनीकी समस्या आने पर अतिरिक्त समय अथवा पुनः परीक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
सबसे अहम सवाल—परीक्षा में असफल होने पर सेवा का क्या होगा? विभागीय TET को लेकर शिक्षकों की चिंताओं के बीच मंच ने शासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि परीक्षा में शामिल होने के कितने अवसर दिए जाएंगे और निर्धारित अवधि में पात्रता हासिल नहीं कर पाने पर नौकरी, वेतन, पदोन्नति तथा अन्य सेवा लाभों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। मंच ने प्राथमिक स्तर पर कार्यरत सहायक शिक्षकों को उच्च प्राथमिक स्तर की पात्रता परीक्षा में शामिल होने का अवसर देने की मांग भी उठाई है।मंच के अनुसार, परीक्षा से संबंधित सभी शर्तें पहले से स्पष्ट होना आवश्यक है, ताकि शिक्षक बिना किसी भ्रम के तैयारी कर सकें और परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष ढंग से पूरी हो सके।
शिक्षकों के अनुभव और सेवा हितों का हो सम्मान : रविंद्र राठौर ने कहा कि विभागीय TET की रूपरेखा तय करते समय सेवारत शिक्षकों के अनुभव, सेवाकाल और सेवा हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। परीक्षा के नियमों के साथ सेवा संबंधी प्रावधान भी स्पष्ट किए जाएं, जिससे शिक्षकों के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो सके।
प्रदीप पाण्डेय ने CBT की तैयारी के लिए मांगी ठोस व्यवस्था : प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि CBT परीक्षा से पहले प्रशिक्षण और मॉक टेस्ट की व्यवस्था जरूरी है। प्रत्येक जिले में पर्याप्त परीक्षा केंद्र बनाए जाएं तथा तकनीकी खामियों के कारण किसी शिक्षक का परीक्षा परिणाम प्रभावित न हो, इसके लिए पहले से प्रभावी इंतजाम किए जाएं।
विकास सिंह राजपूत ने पारदर्शी और समान अवसर वाली व्यवस्था पर दिया जोर : विकास सिंह राजपूत ने कहा कि परीक्षा के अवसरों, उत्तीर्ण अंकों और सेवा संबंधी परिणामों को लेकर शासन स्पष्ट नीति जारी करे। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों स्तरों की परीक्षा देने के इच्छुक शिक्षकों को समान अवसर मिलना चाहिए तथा पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यावहारिक होनी चाहिए।शिक्षक साझा मंच ने शासन से मांगपत्र पर शीघ्र निर्णय लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।
मंच का कहना है कि विभागीय TET की सफलता के लिए परीक्षा का आयोजन जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी सेवारत शिक्षकों की आशंकाओं का समाधान और उनके सेवा हितों को लेकर स्पष्टता सुनिश्चित करना भी है। अब शिक्षकों की निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं।






