शिक्षकों के संलग्नीकरण के बाद अब नियम विरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर कसेगा शिकंजा, शिक्षा विभाग में सैकड़ों की संख्या में 5 से लेकर 10 सालों प्रतिनियुक्ति अवधि खत्म होने बाद भी जमे हैं शिक्षा मंत्री से हुई है शिकायत
संलग्नीकरण खत्म, अब अवैध प्रतिनियुक्ति की बारी: 10 सालों से दफ्तरों में 'अफसरी' झाड़ रहे शिक्षकों पर कब कसेगा शिकंजा? नियमों की धज्जियां: RTI में जानकारी छिपा रहा विभाग, सालों से दफ्तरों में जमे शिक्षकों की फाइलें धूल फांक रहीं
रायपुर प्रवक्ता.कॉम 1 सितंबर 2026
प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में हाल ही में संलग्नीकरण (अटैचमेंट) समाप्त कर शिक्षकों को वापस मूल स्कूलों में भेजने की कार्रवाई के बाद अब खाली पड़े प्रशासनिक पदों को भरने और व्यवस्था को सुचारू बनाने की कवायद तेज हो गई है। हालांकि, इस प्रशासनिक सुधार के बीच वर्षों से अवैध रूप से प्रतिनियुक्ति (डिप्यूटेशन) पर जमे शिक्षकों और अधिकारियों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठने लगा है। नियम विरुद्ध तरीके से पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से प्रशासनिक पदों पर काबिज शिक्षकों, व्याख्याताओं, प्रधान पाठकों और प्राचार्यों को हटाने की मांग अब तूल पकड़ रही है।
4 साल की सीमा, लेकिन 10 साल से जमे हैं ‘मासाब’
विभागीय नियमानुसार प्रतिनियुक्ति की अधिकतम अवधि 4 वर्ष तय है, लेकिन विभागीय अनदेखी के चलते बिना किसी वैध समयावधि विस्तार के सैकड़ों शिक्षक-अधिकारी सालों से दफ्तरों में अफसरी कर रहे हैं। राज्य शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), समग्र शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा मंडल, ओपन स्कूल राज्य कार्यालय से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर के कार्यालयों (DEO, BEO, BRC, DMC) में सहायक संचालक, एपीसी, एमआईएस प्रशासक जैसे पदों पर नियम विरुद्ध पदस्थापना बनी हुई है।
रायपुर साक्षरता ने डीपीओ
साक्षरता विभाग में पिछले 8 वर्षों से एक व्याख्याता स्कूल में पढ़ाने के बजाय प्रशासनिक कार्य संभाल रही हैं।
कबीरधाम व धरसीवां:
कबीरधाम जिले के एमआईएस प्रशासक से लेकर डीईओ कार्यालय में सहायक संचारक के पद पर एम के गुप्ता , यू आर चंद्राकर प्राचार्य जमे हुए हैं । कई साल से उनके ऊपर कांग्रेस और भाजपा सरकार की मेहरबानी बनी हुई है।
रायपुर डीईओ कार्यालय से लेकर समग्र शिक्षा में कई व्याख्याता कार्यरत हैं । कांग्रेस के कार्यकाल में इनकी प्रतिनियुक्ति हुई थी । एबीईईओ के पद के विरुद्ध धरसीवां कार्यालय में पदस्थ प्रदीप शर्मा भी कई साल से बतौर एबीईईओ पदस्थ हैं। आखिर ये सब चल कैसे रहा है। विभाग की इस अराजकता को ठीक करने की जरूरत है। शिक्ष मंत्री जी स्वयं कह चुके हैं यह सब नहीं चलेगा। उन्होंने संलग्नीकरण पर बड़ा प्रहार करके दिखा दिया है ।
कोरबा जिला:
कोरबा में कई बीआरसीसी (BRCC) ऐसे हैं जिनकी प्रतिनियुक्ति पिछली सरकार या उससे भी पहले के शासनकाल में हुई थी, जो आज तक जारी है।काग्रेस कार्यकाल में मंत्री के ओएसडी रहे एक अधिकारी जो इस समय डीपीआई में उनको भी अब ज्ञात है। क्योंकि अधिकतर फाइल उस समय ही चलाई गईं थी । अब समय हो गया है नियमानुसार कार्यवाही होनी चाहिए। शिक्षा मंत्री के स्थानीय कार्यालय को इस संबंध में फाइल तलब करने की जरूरत है।
सूचना के अधिकार में जानकारी देने से परहेज
शिक्षकों के सहायक संगठनों और स्वयंसेवक शिक्षक संघों ने इस पूरी अनियमितता की शिकायत शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से प्रत्यक्ष रूप से की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब प्रतिनियुक्ति की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है, तो इन्हें तत्काल प्रभाव से मूल पदस्थापना (स्कूलों) में वापस भेजा जाना चाहिए। वहीं, सूचना के अधिकार (RTI) के तहत भी विभाग ऐसी प्रतिनियुक्तियों की जानकारी देने से कतरा रहा है। आरोप है कि अवर सचिव आर.पी. वर्मा सहित स्कूल शिक्षा सचिवालय और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के वरिष्ठ अधिकारियों को पूरी स्थिति की जानकारी होने के बावजूद फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
अब देखना यह होगा कि संलग्नीकरण समाप्त करने के बाद क्या शिक्षा विभाग 10 सालों से जमे इन ‘शिक्षक-अफसरों’ की अवैध प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें वापस कक्षाओं में भेजने का कड़ा कदम उठाता है या नहीं।






