छत्तीसगढ़ के पौने पाँच लाख कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक सौगात कैशलेस स्वास्थ्य योजना 1 जनवरी 2027 से होगी लागू, इलाज की राशि हुई ‘अनलिमिटेड जानिए कैसे होगी इलाज की पूरी प्रक्रिया ?
ई-हेल्थ कार्ड अनिवार्य: इलाज के लिए टीएमएस (TMS) पोर्टल के जरिए ऑनलाइन पूर्व मंजूरी और ई-हेल्थ कार्ड दिखाना अनिवार्य होगा।रेफरल प्रक्रिया: दुर्ग-भिलाई या रायपुर में सामान्य दाखिले के लिए सिविल सर्जन की अनुशंसा जरूरी होगी। वहीं, देश के अन्य राज्यों के 66 अनुशंसित अस्पतालों में जाने के लिए विशेष रेफरल समिति का प्रमाण पत्र आवश्यक होगा।इमरजेंसी प्रावधान: आपातकालीन (इमरजेंसी) स्थिति में 7 दिनों के भीतर कार्यालय से स्वीकृति लेनी होगी
रायपुर प्रवक्ता. कॉम 2 नवंबर 2026
रायपुर
छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। राज्य सरकार के लगभग पौने पाँच लाख (4.75 लाख) नियमित कर्मचारियों को अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करने या मेडिकल एडवांस और बिल प्रतिपूर्ति के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने की मजबूरी से मुक्ति मिलने जा रही है। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (चिकित्साचर्या) नियमों के तहत इस कैशलेस स्वास्थ्य योजना को लागू किया जा रहा है, जो आधिकारिक तौर पर 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगी। इस योजना के तहत आगामी नवंबर महीने से ही ई-हेल्थ कार्ड बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी।
अमित कटारिया की संवेदनशील पहल: इलाज की राशि हुई ‘अनलिमिटेड’
इस महत्वपूर्ण योजना के सफल क्रियान्वयन और इसे कर्मचारियों के लिए पूरी तरह सुगम बनाने में हेल्थ डायरेक्टर अमित कटारिया की भूमिका अत्यंत संवेदनशील, सराहनीय एवं सहयोगात्मक रही है। उनकी विशेष पहल और दूरदर्शिता के कारण ही इस स्वास्थ्य योजना में इलाज की राशि की ऊपरी सीमा (लिमिट) को समाप्त कर इसे पूरी तरह से ‘अनलिमिटेड’ कर दिया गया है। पहले जहाँ गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए 5 से 10 लाख रुपये तक की ही सीमा तय थी और फण्ड या अनुमति के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था, वहीं अब अमित कटारिया के प्रयासों से कर्मचारी बिना किसी वित्तीय बाधा के बेफिक्र होकर अपना उच्च स्तरीय इलाज करा सकेंगे।
योजना की मुख्य विशेषताएँ और लाभ:
दफ्तरों के चक्कर खत्म
अस्पताल में केवल ई-हेल्थ कार्ड दिखाते ही इलाज की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो जाएगी, जिससे बाबूगीरी और कागजी कार्रवाई का दौर पूरी तरह समाप्त हो गया है।
कार्ड और सत्यापन प्रक्रिया
कर्मचारियों के एम्प्लॉई आईडी और आश्रित परिजनों के आधार सत्यापन के बाद डीडीओ (DDO) ऑनलाइन ई-हेल्थ कार्ड जारी करेंगे। अस्पताल में भर्ती के समय इसी कार्ड को दिखाना होगा।
देश और राज्य के बेहतरीन अस्पताल शामिल
इस योजना के तहत राज्य के स्थानीय अस्पतालों से लेकर देश के शीर्ष मेडिकल संस्थानों में मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी
स्थानीय स्तर पर
दुर्ग-भिलाई सहित राज्य के प्रमुख अस्पतालों में विशेष सुविधाएँ मिलेंगी।देश के बड़े संस्थान: दिल्ली के एम्स, गंगाराम, फोर्टिस, मुंबई के लीलावती, कोकिलाबेन, और वेल्लोर-हैदराबाद के प्रतिष्ठित अस्पतालों सहित देश के 126 से अधिक चुनिंदा अस्पताल इस नेटवर्क का हिस्सा हैंैं
अंग प्रत्यारोपण और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियाँ कैंसर, हार्ट अटैक, ऑर्गन ट्रांसप्लांट और न्यूरो जैसी जटिल समस्याओं के लिए रायपुर और देश के अन्य बड़े सुपर-स्पेशलिटी अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराया जा सकेगा।
भर्ती और अप्रूवल से जुड़े 3 मुख्य नियम
ई-हेल्थ कार्ड अनिवार्य: इलाज के लिए टीएमएस (TMS) पोर्टल के जरिए ऑनलाइन पूर्व मंजूरी और ई-हेल्थ कार्ड दिखाना अनिवार्य होगा।रेफरल प्रक्रिया: दुर्ग-भिलाई या रायपुर में सामान्य दाखिले के लिए सिविल सर्जन की अनुशंसा जरूरी होगी। वहीं, देश के अन्य राज्यों के 66 अनुशंसित अस्पतालों में जाने के लिए विशेष रेफरल समिति का प्रमाण पत्र आवश्यक होगा।इमरजेंसी प्रावधान: आपातकालीन (इमरजेंसी) स्थिति में 7 दिनों के भीतर कार्यालय से स्वीकृति लेनी होगी।हेल्थ डायरेक्टर अमित कटारिया की इस अनूठी और कर्मचारी-हितैषी पहल से राज्य के लाखों कर्मचारियों में खुशी की लहर है, और यह योजना छत्तीसगढ़ के शासकीय सेवकों के स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।





