अगर मैं यह अनशन छोड़ दूं तो यह आंदोलन असफलता का इतिहास बन जाएगा ! सोनम वांगचुक: जानिए कोई शख्स 21 दिनों से भूख हड़ताल में क्यों बैठा है?
सोनम वांगचुक का यह अनशन सिर्फ एक विरोध नहीं बल्कि अपने विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक है। चाहे विचार अलग हों, लेकिन अपने उद्वेश्य के लिए इतना बडा त्याग करने का साहस हर किसी में नहीं होता। आपकी डस लडार्ड का परिणाम जो भी हो, आपका साहस हमेशा याद रखा जाएगा
दिल्ली
प्रवक्ता.कॉम 19 जुलाई 2026
नई दिल्ली: प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक, जो पिछले 21 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे थे, को 18 जुलाई, 2026 की सुबह दिल्ली पुलिस द्वारा सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

आंदोलन का कारण
सोनम वांगचुक 28 जून, 2026 से नीट-यूजी (NEET-UG) सहित अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी मुख्य मांगों में केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करना और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल है।
अस्पताल में भर्ती और स्वास्थ्य स्थिति
मेडिकल इमरजेंसी:
दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश और बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए पुलिस ने उन्हें अस्पताल स्थानांतरित किया। अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, वांगचुक गंभीर डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन (जैसे पोटेशियम की कमी) से जूझ रहे हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है।
उपचार से इनकार:
अस्पताल में रहने के बावजूद, सोनम वांगचुक ने लगातार चिकित्सा सलाह की अनदेखी की है और इलाज (IV फ्लूइड और दवाइयां) लेने से इनकार कर दिया है। वे अभी भी उपवास जारी रखे हुए हैं।
प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल
पुलिस की कार्रवाई:
सरकार और दिल्ली पुलिस ने इसे ‘कानून-व्यवस्था’ का मामला बताया है। 20 जुलाई, 2026 से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा नियोजित रैली के मद्देनजर प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी, जिसके कारण जंतर-मंतर से उन्हें हटाना आवश्यक माना गया।
आंदोलन की स्थिति:
सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने वांगचुक के उठाए जाने के विरोध में खुद अनशन शुरू कर दिया है और 20 जुलाई को संसद मार्च की घोषणा की है।
सोनम वांगचुक का यह संघर्ष अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट और राजनीतिक चर्चा का विषय बन चुका है। हालांकि उन्हें अस्पताल ले जाया गया है, लेकिन उनके आंदोलन के आधिकारिक रूप से समाप्त होने की कोई घोषणा अभी तक नहीं की गई है।
कौन हैं सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक (जन्म 1 सितंबर 1966) लद्दाख के एक जाने-माने इंजीनियर और शिक्षा सुधारक हैं। वे ‘स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख’ (SECMOL) के संस्थापक-निदेशक हैं। उन्हें मुख्य रूप से शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और लद्दाख के दुर्गम क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए किए गए उनके कार्यों के लिए जाना जाता है। लोकप्रिय फिल्म ‘3 इडियट्स’ का ‘फुंसुख वांगडू’ का किरदार उन्हीं के जीवन से प्रेरित माना जाता है।
सोनम वांगचुक ने लद्दाख में जो SECMOL (स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख) स्कूल स्थापित किया है, वह भी काफी हद तक फिल्म में दिखाए गए ‘फुनसुक वांगडू’ के उस स्कूल जैसा है, जहाँ बच्चे अपनी मर्जी और रुचि से सीखते हैं। उनका मानना है कि शिक्षा केवल डिग्री पाने के लिए नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं को हल करने के लिए होनी चाहिए।
इसी विचारधारा और उनके ‘आइस स्तूप’ (कृत्रिम ग्लेशियर बनाकर पानी की समस्या हल करना) जैसे कार्यों ने उन्हें भारत के सबसे प्रभावशाली शिक्षा सुधारकों और वैज्ञानिकों की श्रेणी में ला खड़ा किया है।
लोग सोनम वांगचुक के लिए कुछ इस तरह से लिख रहे हैं
“जब कोई इंसान अपने सिद्धांतों के लिए अपनी भूख, आराम और सेहत तक दांव पर लगा देता है, तो वह सिर्फ अपने लिए नहीं., आने वाली पीढियों के भविष्य के लिए लड रहा होता है
सोनम वांगचुक का यह अनशन सिर्फ एक विरोध नहीं बल्कि अपने विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक है। चाहे विचार अलग हों, लेकिन अपने उद्वेश्य के लिए इतना बडा त्याग करने का साहस हर किसी में नहीं होता।
आपकी डस लडार्ड का परिणाम जो भी हो, आपका साहस हमेशा याद रखा जाएगा। सोनम वांगचुक






