ब्लैकलिस्टेड मेसर्स हरी स्टोर्स मामला: स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय ने दिए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश, तत्कालीन सिविल सर्जन की भूमिका भी जांच के घेरे में
रायपुर: प्रवक्ता.कॉम 3 सितंबर 2026
स्वास्थ्य विभाग में नियम ताक पर रखकर करोड़ों रुपये का टेंडर हासिल करने वाले ब्लैकलिस्टेड फर्म ‘मेसर्स हरी स्टोर्स, धमतरी’ के मामले में बड़ी कार्रवाई के संकेत मिले हैं। प्रवक्ता डॉट कॉम द्वारा प्रमुखता से उजागर किए गए इस मामले की विस्तृत शिकायत आज स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय में दर्ज कराई गई। स्वास्थ्य मंत्री के विशेष सहायक ने मामले का संज्ञान लेते हुए अलग से उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।
यह पूरी कार्रवाई राज्य की विष्णुदेव साय सरकार की ‘भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत की जा रही है, जिसमें किसी भी स्तर पर पाई गई गड़बड़ी पर निष्पक्ष जांच और कठोर दंडात्मक कदम उठाने की बात कही गई है।
प्रमुख बिंदु और जांच के मुख्य विषय
फर्जी सर्टिफिकेट और ब्लैकलिस्टिंग: जिला अस्पताल कोंडागांव में टेंडर के दौरान सीमेंस (Siemens) कंपनी का कूट-रचित ऑथराइजेशन सर्टिफिकेट जमा करने पर फर्म को 17 जून 2022 से 16 जून 2025 (3 वर्ष) के लिए राज्य के सभी सरकारी टेंडरों से ब्लैकलिस्ट किया गया था।
जांजगीर-चांपा में करोड़ों का टेंडर: प्रतिबंध अवधि के बावजूद फर्म ने जांजगीर-चांपा में 5 करोड़ रुपये से अधिक का सरकारी टेंडर हासिल कर लिया।
तत्कालीन सिविल सर्जन/सीएमएचओ की संदिग्ध भूमिका: आरटीआई से खुलासा हुआ है कि अस्पताल के सरकारी रिकॉर्ड में ब्लैकलिस्ट हटाने का कोई आदेश मौजूद नहीं है। इसके बावजूद कथित पत्र पर तत्कालीन सिविल सर्जन के हस्ताक्षर होने से उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पोर्टल पर जानकारी छिपाने की आशंका: क्या फर्म के ब्लैकलिस्ट होने की जानकारी विभागीय पोर्टल पर साजिशन दबाई गई थी, इसकी भी जांच होगी।
कठोर कार्रवाई की तैयारी: यदि निष्पक्ष जांच में फर्जीवाड़ा साबित होता है, तो दोषियों के खिलाफ एफआईआर (FIR), राशि की वसूली और फर्म को स्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट करने जैसी कार्रवाई की जाएगी।
यदि इस मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होती है, तो स्वास्थ्य विभाग में जारी फर्जीवाड़े का पूरा सच सामने आ जाएगा।

